वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के उपनेता विपक्ष प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में गंभीर चूक का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सोवियत रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान लोकसभा और राज्यसभा के नेताओं को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत बैठक का समय न देकर मोदी सरकार ने स्थापित संसदीय परंपराओं का उल्लंघन किया है। तिवारी के अनुसार राष्ट्रपति के सम्मान में आयोजित भोज में कांग्रेस संसदीय दल के एक सदस्य को बुलाया गया, लेकिन पार्टी अध्यक्ष और दोनों सदनों के नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया, जो भारत–सोवियत मैत्री की ऐतिहासिक विरासत के विपरीत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के निर्वाण दिवस पर उनके प्रबल अनुयायी और कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को आमंत्रित न करना राजनीतिक विद्वेष का उदाहरण है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर अदालत में हुए जूता फेंकने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने आरोपी का महिमामंडन होने दिया।
तिवारी ने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में इंडिगो की 64 प्रतिशत हिस्सेदारी को एकाधिकार बताते हुए इसे बड़ा आर्थिक घोटाला करार दिया। उनका कहना है कि नए रूटों के आवंटन में नियमों की अनदेखी कर अन्य कंपनियों को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने मांग की है कि इस प्रकरण की जांच सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में हो ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके।