– सही सैंपलिंग से निर्दोष को बचाया जा सकता है: एडीजी अरोरा
– 45 दिवसीय क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स में 100 कर्मियों ने शुरू किया प्रशिक्षण
— फोरेंसिक दक्षता बढ़ाने को यूपीएसआईएफएस में शुरू हुआ नया प्रशिक्षण
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज, लखनऊ में आज “क्राइम सीन मैनेजमेंट” कोर्स का शुभारम्भ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा के मार्गदर्शन में शुरू किए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी और एडीजी टेक्निकल सर्विसेज नवीन अरोरा ने किया। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए आरक्षी, मुख्य आरक्षी और उपनिरीक्षक स्तर के 100 प्रतिभागी इस पहले बैच का हिस्सा बने। कार्यक्रम में एडीजी नवीन अरोरा को संस्थान की ओर से सैपलिन और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
डॉ. गोस्वामी ने बताया कि कोर्स 45 दिनों तक चलेगा और इसे नए कानूनों तथा वर्तमान पुलिस आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि सात वर्ष या उससे अधिक दंड वाले अपराधों में फोरेंसिक टीम द्वारा अनिवार्य स्थल निरीक्षण की व्यवस्था के चलते प्रशिक्षार्थियों की भूमिका अत्यंत अहम हो जाती है। निठारी कांड का उदाहरण देते हुए उन्होंने विवेचना की शुरुआती प्रक्रिया में होने वाली छोटी त्रुटियों के गंभीर परिणामों पर भी प्रकाश डाला।
एडीजी नवीन अरोरा ने कहा कि यदि घटना स्थल से सैंपल सही तरीके से उठाए जाएं तो निर्दोष व्यक्ति कभी सजा का भागीदार नहीं बन सकता। उन्होंने नमूने उठाने की विधि, उनके संरक्षण और चेन ऑफ कस्टडी की महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। अरोरा ने प्रशिक्षार्थियों से अपेक्षा जताई कि इस प्रथम बैच के सदस्य होने के नाते वे सर्वोत्तम मानक स्थापित करेंगे। कार्यक्रम के अंत में अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया।