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जिहाद की शब्दावली से मुस्लिम समाज को नुकसान, पसमांदा नेता का मदनी पर तीखा हमला

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मौलाना महमूद मदनी के हालिया विवादित बयान पर मुस्लिम समाज के भीतर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि ‘जिहाद’ जैसी शब्दावली का बार-बार सार्वजनिक मंचों पर प्रयोग मुसलमानों, विशेषकर पसमांदा समुदाय, को अनावश्यक संदेह के घेरे में धकेलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान माहौल को तनावपूर्ण बनाते हैं और समाज में गलतफहमियां बढ़ाते हैं।
अनीस मंसूरी के अनुसार मुसलमानों की असली चुनौतियां शिक्षा, रोजगार, सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन और सरकारी योजनाओं में बराबरी की हिस्सेदारी हैं, जिन पर मौन रहकर विवादित शब्दों को उछालना समुदाय के साथ नाइंसाफी है। उन्होंने कहा कि मदनी का यह रवैया नेतृत्व नहीं, बल्कि मुसलमानों को गुमराह करने जैसा है।
मंसूरी ने कहा कि यदि मौलाना महमूद मदनी वास्तविक एकजुटता और बेहतरी की बात करते हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपने ही चाचा मौलाना अरशद मदनी से मतभेद समाप्त करने चाहिए। उनके अनुसार समुदाय को भाषणों से नहीं, बल्कि सही नीयत और ईमानदार प्रयासों से दिशा मिलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पसमांदा समाज किसी भी ऐसी बयानबाजी का समर्थन नहीं करेगा, जो देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करे या मुसलमानों की सुरक्षा और भविष्य पर असर डाले। उन्होंने कहा कि भारत संवाद, साझा संस्कृति और संविधान पर चलता है, भड़काऊ भाषा पर नहीं, और मुसलमानों को चाहिए कि वे ऐसे विवादास्पद वक्तव्यों से दूरी बनाए रखें।

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