वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर जारी अधिवक्ताओं के आंदोलन के बीच भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी का बयान भड़काऊ टिप्पणी की सीमा तक पहुंच गया, जिसके बाद वकीलों में तीखा रोष फैल गया. बुधवार सुबह सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता सांसद के मेरठ स्थित आवास के बाहर एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया. वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट बेंच की मांग पूरी तरह न्यायसंगत, संवैधानिक और क्षेत्रीय न्याय–सुगमता से जुड़ा मुद्दा है, जिसे किसी राजनीतिक धमकी, द्वंद्व या उकसावे के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
सांसद ने प्रयागराज में प्रैक्टिस कर रहे वकीलों से समर्थन न मिलने की स्थिति में विरोध की चेतावनी देते हुए कहा था कि जब तक प्रयागराज में “आग नहीं लगेगी”, तब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता जलते रहेंगे और वहां के लोग लाभ उठाते रहेंगे। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद वेस्ट यूपी के अधिवक्ताओं ने इसे न्यायिक मर्यादा और अधिवक्ता समुदाय की गरिमा पर हमला बताया. डीएवी कॉलेज, बार एसोसिएशन और अन्य जिलों में भी विरोध की चिंगारी फैलती दिखाई दी।
आंदोलनकारियों ने दोटूक कहा कि न्यायिक बुनियादी ढांचे की मांग को भावनात्मक उकसावे से जोड़ना अस्वीकार्य है. इसके विरोध में मेरठ, शामली, मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर, ग़ाज़ियाबाद समेत कई ज़िलों में अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहे. विभिन्न जनपदों में सांसदों के आवासों का घेराव शुरू कर दिया गया और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है, लेकिन अधिवक्ता समुदाय ने साफ संकेत दिया है कि बयान पर माफ़ी और न्यायिक बेंच की दिशा में ठोस पहल के बिना आंदोलन और तेज किया जाएगा।