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शहादत की छाया में एक प्रार्थना, मुख्यमंत्री ने श्री तेग बहादुर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की

वेब वार्ता ( न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। डी.ए.वी. डिग्री कॉलेज का प्रांगण आज किसी आम शैक्षणिक हलचल से परे एक पवित्र मौन में डूबा था। 350वें गुरु तेग बहादुर साहिब के शहीदी दिवस पर आयोजित विशेष गुरुमति समागम में सम्मिलित होना मेरे लिए किसी स्मृति यात्रा से कम नहीं था। सुबह की हल्की धूप में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच की ओर बढ़े, उनकी चाल में राजनीति की कोई हलचल नहीं, बल्कि सम्मान की गंभीरता थी।
मुख्यमंत्री ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के समक्ष मत्था टेका तो वातावरण सहज ही श्रद्धा से भर गया। मुझे उस क्षण लगा जैसे चारों ओर शब्द नहीं, अरदास की ध्वनि तैर रही हो। मुख्यमंत्री ने गुरु तेग बहादुर, भाई मतीदास, भाई सतीदास और भाई दयाल की शहादत को याद कर उन्हें प्रदेश सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। यह केवल औपचारिक नमन नहीं था, यह इतिहास की पीड़ा और गौरव के प्रति एक साझा स्वीकार था। जब उन्होंने कहा कि लखनऊ सौभाग्यशाली है कि इसे गुरु महाराज का सान्निध्य मिला, तो मेरे भीतर याहियागंज गुरुद्वारे की स्मृतियां जाग उठीं। वह प्रसंग जब गुरु गोबिंद सिंह जी शिशु अवस्था में गुरु तेग बहादुर के साथ वहां आए थे, एकदम जीवंत चित्र की तरह मन में उभर गया।
आज मुझे समझ आया कि कुछ शहादतें केवल इतिहास में नहीं रहतीं, वे पीढ़ियों की चेतना में बसकर समाज को एक अदृश्य अनुशासन और करुणा सिखाती हैं। उस दिन कॉलेज परिसर से लौटते हुए कदम थमे-थमे थे, पर मन उठा-उठा—कृतज्ञता से भरा हुआ।
इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख, नीरज सिंह एवं गुरुद्वारा प्रबन्ध समिति के पदाधिकारीगण सहित अन्य नागरिक उपस्थित थे।

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