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धुंध की गिरफ्त में दिल्ली: सांसों पर संकट और घरों में सिमटता जनजीवन

 – गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, बुधवार तक प्रदूषण से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि हवा की गति धीमी रहने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में बने रहेंगे।
वेब वार्ता ( न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
दिल्ली । दिल्ली की हवा इन दिनों मानो किसी अदृश्य ज़हर से भर गई है। दीपावली के बाद से लगातार बढ़ते प्रदूषण ने राजधानी को एक घने, दमघोंटू धुंधलके में कैद कर दिया है। सुबह का सूरज धुएँ की मोटी चादर में धुंधला पड़ जाता है और सड़कें भी मानो किसी धूम्र–तेल चित्र की धुंधली रेखाओं जैसी दिखने लगी हैं। लोगों की दिनचर्या घर से बाहर कदम रखते ही खांसी, जलन और साँसों की तकलीफ में बदल रही है। ऐसे माहौल में दिल्ली का औसत एक्यूआई 363 तक पहुँच जाना सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि जीवन की असहज होती धड़कनों की कहानी है।
सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकारी और निजी संस्थानों के 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया है। यह निर्णय दिल्ली की हवा में घुले जहरीले तत्वों से जनजीवन को बचाने का एक तात्कालिक प्रयास है। आनंद विहार, रोहिणी, जहांगीरपुरी और वजीरपुर जैसे क्षेत्रों में एक्यूआई 400 से ऊपर दर्ज होना बताता है कि हवा अब सीधे स्वास्थ्य पर हमला कर रही है। अस्पतालों के आसपास भी एक्यूआई ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में है, जिससे मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए समस्याएँ बढ़ गई हैं।
नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम भी इसी जहरीले दायरे में आ गए हैं, जिससे पूरा एनसीआर एक बड़े प्रदूषण–कक्ष में तब्दील हो गया है। मौसम विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार राहत मिलने में अभी कई दिन लग सकते हैं। इस बीच, दिल्ली का हर घर, हर गली और हर व्यस्त सड़क मानो एक ही संदेश दे रही है—सांसें अब पहले जैसी नहीं रहीं।

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