– नीतीश की वापसी में महिलाओं की निर्णायक मुहर
– महिला शक्ति बनी नीतीश की जीत की असली ताकत
– कैश ट्रांसफर योजना ने बदला बिहार का सियासी गणित
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर नीतीश कुमार को सूबे की सत्ता तक पहुंचा दिया है। लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने की ओर अग्रसर हैं। एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत से यह संदेश साफ है कि जनता ने एक बार फिर उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है।
इस बार नीतीश कुमार की वापसी में महिलाओं का समर्थन निर्णायक साबित हुआ। चुनाव से पहले राज्य की 1.5 करोड़ महिला लाभार्थियों के खाते में 10-10 हजार रुपये के ट्रांसफर ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर को इस योजना का वर्चुअल शुभारंभ करते हुए शुरुआती चरण में 75 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाया था, जो बाद में बढ़कर 1.5 करोड़ तक पहुंच गया।
एनडीए ने इस योजना को ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ नाम दिया है, जिसे स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़कर पेश किया गया। बड़ी संख्या में महिलाओं तक सीधे आर्थिक सहायता पहुंचने से विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ गई और महिलाओं का झुकाव स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर दिखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में महिला मतदाताओं की संख्या और उनका मतदान व्यवहार अब चुनावी नतीजों पर निर्णायक प्रभाव डालता है। इस बार भी वही हुआ—महिला वोटरों ने फिर एक बार नीतीश कुमार के लिए मजबूत ढाल का काम किया, और उनकी दसवीं पारी लगभग तय हो गई है। चुनाव से ठीक पहले 29 अगस्त 2025 को नीतीश कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दी थी। उस समय विपक्ष ने इसे खुलकर ‘वोट खरीदने की कोशिश’ करार दिया, लेकिन चुनावी नतीजों ने संकेत दिया कि यह योजना एंटी-इनकंबेंसी को निष्प्रभावी करने में कारगर रही।
महिला मतदाताओं के बीच सीधा आर्थिक हस्तांतरण सियासी रूप से बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ। सरकार ने लगभग 1.5 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए, जबकि राज्य में महिला मतदाताओं की कुल संख्या करीब 3 करोड़ 60 लाख है।
‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का लाभ बड़ी आबादी तक पहुंचने से महिलाओं का झुकाव स्पष्ट रूप से एनडीए की तरफ गया और अंततः गठबंधन को इसका सीधा लाभ मिला।