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कुत्तों को इंसानों से अलग करना प्रकृति के खिलाफ : डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल

– एमएलसी बोले – आदिकाल से हमारे साथ रह रहे, इस धरा पर उनका भी हक
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। विधानसभा की दैवीय आपदा प्रबंधन समिति के सभापति एवं सदस्य विधान परिषद डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा है कि कुत्ते मानव सभ्यता के सबसे पुराने और वफादार साथी हैं। उन्हें इंसानों से अलग करना प्रकृति और नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है।
डॉ. निर्मल ने कहा कि पुरातात्विक प्रमाणों से स्पष्ट है कि लगभग 15,000 से 30,000 वर्ष पहले कुत्तों का पालतूकरण शुरू हुआ था। वे शिकार में मदद करते थे, घर की रखवाली करते थे और इंसान के अकेलेपन में साथ निभाते थे। आज भी वे अपने उसी दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं। उनकी मौजूदगी से इंसान खुद को अधिक सुरक्षित और निश्चिंत महसूस करता है।
उन्होंने कहा कि इस धरती पर कुत्तों का हक इसलिए भी है क्योंकि वे वफादार, बुद्धिमान और संवेदनशील प्राणी हैं। वे बिना शर्त प्यार देते हैं, तनाव कम करते हैं और मानसिक स्वास्थ्य सुधारते हैं। आज भी पुलिस, सेना, खोज-बचाव और थेरेपी के क्षेत्रों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. निर्मल ने अफसोस जताया कि समाज का बड़ा हिस्सा अब भी इन जीवों को सड़कों पर भूखा, घायल और असहाय छोड़ देता है। उन्होंने कहा कि कुत्तों का हक सिर्फ जीने का नहीं, बल्कि सम्मान से जीने का है। एक कटोरा पानी, थोड़ा सा खाना या एक प्यार भरी दुलार — यही उनके जीवन का सबसे बड़ा अधिकार है। उन्होंने कहा “कुत्ते इंसान के सबसे सच्चे दोस्त हैं। अगर हम उन्हें दोस्त मान लें, तो यह धरती सचमुच दोनों की हो जाएगी।”

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