वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) ने अपना 72वां वार्षिक दिवस उत्साहपूर्वक मनाया। इस अवसर पर हनी बी नेटवर्क के संस्थापक और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व प्रोफेसर प्रो. अनिल कुमार गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने “आकांक्षी समुदायों के लिए जैव-उद्यमिता विकल्प : नैतिक और उत्तरदायी विज्ञान की ओर” विषय पर व्याख्यान दिया और संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना की।
वार्षिक दिवस पर निदेशक डॉ अजित कुमार शासनी ने वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और संस्थान द्वारा प्राप्त कुछ प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एनबीआरआई ने गुलाबी बॉलवर्म प्रतिरोधी दुनिया का पहला जीएम कपास विकसित कर वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की है। इस तकनीक से ₹4 करोड़ का लाइसेंस राजस्व अर्जित हुआ, जो भारतीय कृषि जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र का अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा है। इसके साथ ही, वैज्ञानिकों ने 19 नई लाइकेन प्रजातियों की खोज की और 38 नई प्रजातियों को देश के वनस्पति रिकॉर्ड में जोड़ा।
संस्थान ने पारंपरिक औषधियों के वैज्ञानिक सत्यापन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। कॉप्टिस टीटा पौधे पर हुए शोध से गठिया और मूत्र-पथरी के इलाज में इसके औषधीय गुण सिद्ध हुए। सतत कृषि के लिए बायोचार आधारित पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों का विकास भी किया गया, जो प्रदूषण नियंत्रण और मिट्टी की गुणवत्ता सुधार में सहायक हैं। जैसे गुलाबी बॉलवर्म प्रतिरोधी दुनिया का पहला जीएम कपास, भारत के पादप जैव विविधता रिकॉर्ड का विस्तार, पारंपरिक चिकित्सा का आधुनिक सत्यापन। चार नई गुलदाउदी किस्में कृस्तुति, सरस्वती, जगन्नाथ और पद्माकृजारी की गईं और सूखे से निपटने और उपज में सुधार के लिए उत्कृष्ट अलसी और कपास की किस्मों की पहचान की गई। 138 वर्षों के बाद स्वेर्टिया वट्टी की पुनः खोज की गई और हेरिटेज ट्री गार्डन और तुलसी गार्डन की स्थापना की गईय सीएसआईआर सुगंध और पुष्पकृषि मिशनों के तहत किसानों तक पहुँच ने हरित आजीविका को बढ़ावा दिया। हर्बल गुलाल, सिंदूर, मंदिर के फूलों से शिव भभूत और कमल.आधारित उत्पादों सहित 13 हरित प्रौद्योगिकियों को उद्योग जगत को हस्तांतरित किया गयाए जिससे सतत उद्यमिता को बढ़ावा मिला। पाँच पेटेंट दायर किए, 23 नई परियोजनाएँ शुरू कीं और शिक्षा जगत एवं उद्योग जगत के साथ 29 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
वार्षिक दिवस के अवसर पर बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान और एच.एस. श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी के साथ दो नए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इनका उद्देश्य पादप विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देना है। समारोह के दौरान संस्थान की नई द्विभाषी वेबसाइट का शुभारंभ किया गया और उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए प्रो के एन कौल को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया साथ ही अन्य कई वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया। अंत में मुख्य वैज्ञानिक डॉ विधु ए साने ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।