वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने सोमवार को विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि गो आश्रय स्थलों में पराग पशु आहार की आपूर्ति स्थानीय दुग्ध समितियों के माध्यम से कराई जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि गोशालाओं में गो काष्ठ और मोक्ष दंडिका के उत्पादन हेतु सीएसआर फंड से मशीनें लगाई जाएं, जिससे गोशालाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
श्री सिंह ने भूसा टेंडर में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए अमरोहा, बागपत, इटावा, शामली और मेरठ के अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने निर्देश दिया कि भूसा टेंडर का कार्य तत्काल पूरा किया जाए, अन्यथा कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि किसानों के खेतों से पराली एकत्र कर गौआश्रय स्थलों में बिछावन और पशु आहार के रूप में उपयोग किया जाए। बदले में किसानों को गोबर की खाद उपलब्ध कराई जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ जैविक खाद का प्रोत्साहन भी हो।
उन्होंने निर्देश दिया कि अच्छी गौशालाओं को पुरस्कृत कर प्रेरित किया जाए और सभी गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। पशुओं के टीकाकरण, अवस्थापना कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में लघु पशु योजनाओं का व्यापक प्रचार किया जाए ताकि छोटे किसान और पशुपालक लाभान्वित हो सकें।
दुग्ध विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी दुग्ध समितियों की जनपद स्तर पर समीक्षा की जाए। किसानों के दुग्ध मूल्य का भुगतान एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा कि सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।