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नकली पनीर के साथ अंडों का कारोबार बना खतरा: चमचमाती पैकिंग में घटिया क्वालिटी से स्वास्थ्य पर मंडरा रहा संकट

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। सर्दी में अंडे खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। यह शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ पोषण भी देता है लेकिन अगर आप नकली अंडे खा रहे हैं तो इससे सेहत को फायदे की जगह नुकसान हो जाएगा। भारत में अंडों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। बाजार में उपलब्ध अधिकतर ब्रांड्स शुरुआत में उच्च गुणवत्ता वाले अंडे बेचकर ग्राहकों का भरोसा जीतते हैं, लेकिन लोकप्रियता बढ़ते ही क्वालिटी गिरा देते हैं। उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए ये कंपनियां शानदार पैकेजिंग और अतिशयोक्तिपूर्ण दावों का सहारा लेती हैं।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में बेचे जा रहे अंडों की गुणवत्ता में भारी असमानता देखी जा रही है। एक ही ब्रांड के अंडों में साइज, फ्रेशनेस और स्वाद में फर्क पाया जा रहा है। पैकेजिंग आकर्षक जरूर है, पर अंडों की खोल पतली और ताजगी कम होती जा रही है। ब्रांड्स के नाम भी जटिल हैं जैसे- Natural+ VitaD, Protein Max, Nutra Plus Specialty, जिनका अर्थ उपभोक्ताओं के लिए अस्पष्ट है। यह ‘मेक इट अन्टिल यू कैन फेक इट’ की प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिसमें शुरुआत में अच्छा उत्पाद देकर विश्वास जीता जाता है और बाद में गुणवत्ता से समझौता कर मुनाफा बढ़ाया जाता है।
असल में भारत में अंडों की एक बड़ी समस्या है और यहाँ भारत में अंडों की गुणवत्ता को लेकर कोई सख्त मानक नहीं हैं। अमेरिका या यूरोप की तरह यहां तय नियम लागू नहीं हैं। परिणामस्वरूप, ब्रांड्स ध्यान गुणवत्ता पर नहीं बल्कि मार्केटिंग और कहानीबाजी पर लगाते हैं। कुछ कंपनियां दावा करती हैं कि उनकी मुर्गियां ड्राई फ्रूट या ऑरेंज जूस पीती हैं, ताकि उनके अंडे अधिक पौष्टिक और आकर्षक लगें।
स्थिति इतनी खराब है कि सरकारी स्तर पर मिलने वाले अंडों की गुणवत्ता भी सवालों में है। आंध्र प्रदेश के एल्यूर में स्कूल निरीक्षण के दौरान बच्चों को केवल 31 ग्राम वजन वाले अंडे दिए जा रहे थे, जबकि अमेरिका में एक सामान्य अंडा लगभग 50 ग्राम का होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भारत में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन नहीं किया जाएगा, अंडा कंपनियां 45-50 ग्राम के अंडों को ‘बड़े’ या ‘एक्स्ट्रा बड़े’ कहकर बेचती हैं, जो अगर ताजा हों तो ठीक माना जा सकता है। लेकिन अधिकांश मामलों में यह भी सही नहीं है.तब तक उपभोक्ताओं को सही और पौष्टिक अंडे मिलना मुश्किल रहेगा।
थोड़ी सावधानी और कुछ घरेलू तरीकों से असली और नकली अंडे की पहचान आसानी से की जा सकती है :
असली अंडे का छिलका सामान्यतः थोड़ा खुरदरा और दानेदार होता है। इनका सतह परफेक्ट नहीं होता, बल्कि हल्का असमान दिखाई देता है। इसके विपरीत नकली अंडे का छिलका पूरी तरह चिकना और चमकदार होता है, क्योंकि इसे आर्टिफिशियल कोटिंग से स्मूद बनाया जाता है।अंडे को पानी में डालना सबसे सरल जांच का तरीका है। असली अंडे की घनत्व पानी से अधिक होने के कारण वह नीचे डूब जाता है, जबकि नकली अंडे हल्के होते हैं और सतह पर तैरते हैं। अंडे की जर्दी और सफेदी भी इसके असली या नकली होने का संकेत देती है। असली अंडे की जर्दी गोल और सख्त होती है, जबकि सफेदी पारदर्शी और हल्की पतली रहती है। नकली अंडे की जर्दी अक्सर कम गोल होती है, आसानी से टूट जाती है, और सफेदी असामान्य रूप से गाढ़ी या बहुत पतली होती है। अंडा तोड़ने पर भी फर्क साफ दिखता है। असली अंडे में जर्दी और सफेदी अलग-अलग परतों में रहती हैं, जबकि नकली अंडे में दोनों आपस में मिली हुई और जर्दी का आकार अनियमित होता है।
एक और तरीका है—अंडे को हल्का हिलाना। असली अंडे में कोई आवाज नहीं आती, लेकिन नकली अंडे को हिलाने पर पानी जैसी आवाज सुनाई देती है, क्योंकि इसके अंदर की परतें छिलके से अलग होती हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपभोक्ता ब्रांड के आकर्षक पैकिंग के बजाय अंडे की सतह और ताजगी पर ध्यान दें, ताकि नकली उत्पादों से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

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