Breaking News

पं0 छन्नूलाल मिश्र का सुरलोक गमन, शास्त्रीय संगीत का उज्ज्वल सितारा बुझा, पीएम मोदी व सीएम योगी ने जताई संवेदना

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
मिर्ज़ापुर। पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के निधन हो गया। 89 वर्षीय मिश्र का देहांत मिर्जापुर स्थित गंगादर्शन कॉलोनी के निवास पर सुबह लगभग 4:15 बजे हुआ। उनकी पुत्री और केबी कॉलेज की प्रोफेसर नम्रता मिश्रा ने बताया कि वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और बीते शनिवार को उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसके बाद परिवार ने उन्हें रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल, मिर्जापुर में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही। आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा।
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले के हरिहरपुर गाँव में हुआ था। उन्होंने अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में बनारस में विधिवत संगीत की शिक्षा ली। उन्होंने किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खां से भी गहन संगीत शिक्षा हासिल की। मिश्र बनारस घराने की गायकी के साथ-साथ पूरब अंग की ठुमरी और ख्याल गायकी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे। उनकी प्रस्तुतियां भावपूर्ण और मधुरता से परिपूर्ण होती थीं, जिसके कारण उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ख्याति मिली। वे ठुमरी के प्रमुख प्रतिपादक माने जाते हैं और उनके कई संगीत एल्बम जारी हुए, जिन्हें देश-विदेश में सराहा गया।
अपने लंबे संगीत सफर में पंडित छन्नूलाल मिश्र को अनेक सम्मान प्राप्त हुए। उन्हें उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नौशाद पुरस्कार और यश भारती सम्मान मिला। भारत सरकार ने उनके योगदान को देखते हुए 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से अलंकृत किया। वे संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से भी सम्मानित हुए थे।
पंडित मिश्र के निधन से संगीत जगत शोकाकुल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जाना संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख :
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सदैव उनका स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा। साल 2014 में वे वाराणसी सीट से मेरे प्रस्तावक भी रहे थे। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करता हूं। ओम शांति!’

Check Also

कौशल विकास मिशन का बड़ा कदम, युवाओं को मिलेगा फ्यूचर-रेडी प्रशिक्षण : कपिल देव अग्रवाल

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमारलखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार युवाओं …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Updates COVID-19 CASES