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बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं देने पर सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोका जाना वैध

– इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
– सरकारी कर्मचारियों की याचिका खारिज
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए मोबाइल ऐप ‘ऊर्जा जनशक्ति’ के जरिए बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य करार देते हुए स्पष्ट किया है कि तय प्रक्रिया के अनुसार उपस्थिति दर्ज न करने पर वेतन रोका जाना पूरी तरह कानूनी है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने यह फैसला सत्यनारायण उपाध्याय सहित 10 कर्मचारियों की याचिका खारिज करते हुए सुनाया, जिन्होंने जून 2025 का वेतन रोके जाने के विभागीय आदेश को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि फील्ड ड्यूटी और इंटरनेट की समस्या के कारण वे ऐप पर उपस्थिति दर्ज नहीं कर सके, लेकिन कोर्ट ने पाया कि उन्होंने इंटरनेट बाधा की कोई शिकायत विभाग को नहीं दी थी। कोर्ट ने उनकी शिकायत को अस्पष्ट मानते हुए कहा कि वेतन रोकने का आदेश गलत नहीं है। सरकार की ओर से बताया गया कि 23 सितंबर 2024 को अधिसूचना जारी कर बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली लागू की गई थी, जिसे कभी चुनौती नहीं दी गई। कोर्ट ने साफ किया कि ऐप के जरिए हाजिरी दर्ज करना महज औपचारिकता नहीं, बल्कि सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है।
इस आदेश से उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर बायोमेट्रिक हाजिरी के पालन का दबाव बढ़ेगा। यूपीपीसीएल अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संविदा समेत सभी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य है, और इसका पालन न करने पर वेतन रोकने से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई की जाएगी।

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