– रेजिडेंसी से शहीद स्मारक तक रैली निकाली
– निजीकरण से लालटेन युग लौटेगा
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। शुक्रवार को लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के हजारों बिजलीकर्मी तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे और बिजली के निजीकरण के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की पूर्व संध्या और काकोरी क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर पूरे प्रदेश में “कार्पोरेट घराने, पावर सेक्टर छोड़ो” अभियान की शुरुआत की गई। कर्मचारियों का कहना था कि देश को 2047 तक विकसित बनाने के विजन की रीढ़ बिजली है, और यह तभी सस्ती, भरोसेमंद व सबके लिए सुलभ रह सकती है, जब वह सार्वजनिक क्षेत्र में रहे। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि पिछले आठ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं। एटीएंडसी नुकसान 41% से घटकर 15% पर आ चुका है, जो राष्ट्रीय मानक है।
लखनऊ में आयोजित रैली में बिजलीकर्मियों ने रेजिडेंसी से शहीद स्मारक तक मार्च किया। तिरंगा थामे कर्मचारियों ने क्रांतिकारियों पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह और राजेन्द्र लाहिड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित की और “अमर शहीदों अमर रहो” के नारों से वातावरण को देशभक्ति से भर दिया।
शुक्रवार को लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के हजारों बिजलीकर्मी तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे और बिजली के निजीकरण के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की पूर्व संध्या और काकोरी क्रांति के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर पूरे प्रदेश में “कार्पोरेट घराने, पावर सेक्टर छोड़ो” अभियान की शुरुआत की गई।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की कि विजन डॉक्यूमेंट 2047 को सफल बनाने के लिए बिजली का निजीकरण रोकना जरूरी है। चेतावनी दी गई कि यदि पावर सेक्टर निजी हाथों में गया, तो किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग को महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। निजी कंपनियों के लिए बिजली सेवा नहीं, बल्कि मुनाफे का साधन है, जिससे विकास को झटका लगेगा और प्रदेश फिर से लालटेन युग में लौट सकता है।
कर्मचारियों का कहना था कि देश को 2047 तक विकसित बनाने के विजन की रीढ़ बिजली है, और यह तभी सस्ती, भरोसेमंद व सबके लिए सुलभ रह सकती है, जब वह सार्वजनिक क्षेत्र में रहे। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि पिछले आठ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं। एटीएंडसी नुकसान 41% से घटकर 15% पर आ चुका है, जो राष्ट्रीय मानक है।