– पीडीए पाठशाला चलाकर बच्चों को दिलाएंगे शिक्षा”
– उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के बंद होने पर सपा का संसद में हंगामा
– स्कूलों के मर्जर को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने सरकार को घेरा
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। लोकसभा में उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों के बड़े पैमाने पर बंद किए जाने और स्कूलों के मर्जर को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने सरकार को घेरा। सपा सांसद धर्मेन्द्र यादव, नरेश उत्तम पटेल, लालजी वर्मा, नीरज मौर्य और प्रिया सरोज ने यह मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया और गरीब, वंचित तबके के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने का आरोप लगाया।
सांसद धर्मेन्द्र यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “जहां पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश में शिक्षा का गला घोंटा जा रहा है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के बावजूद प्रदेश में 26,012 प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए और 5,000 से अधिक स्कूलों का जबरन विलय कर दिया गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि दो लाख से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती भी रोक दी गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति विशेष रूप से पीडीए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है। “एक तरफ स्कूल बंद हो रहे हैं, दूसरी तरफ 27,000 से ज्यादा शराब की दुकानें खोली जा रही हैं। सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से गरीब विरोधी हैं,” धर्मेन्द्र यादव ने कहा।
सपा सांसद ने केंद्र सरकार को भी कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह कानून केंद्र का बनाया हुआ है और उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह सुनिश्चित करे कि राज्य सरकार इस कानून का पालन करे। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में ‘डबल इंजन’ की सरकार अब आपस में टकराने लगी है और जनता को उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि अगर सरकार स्कूल बंद करने की अपनी नीति पर कायम रहती है तो समाजवादी पार्टी इसके खिलाफ सड़क से संसद तक आंदोलन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नेता अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि अगर जरूरत पड़ी तो ‘पीडीए पाठशाला’ चलाकर बच्चों को शिक्षा दी जाएगी और कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। इस मुद्दे पर विपक्ष की आवाज ने सरकार पर दबाव जरूर बढ़ाया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई राहत कदम उठाए जाते हैं।