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एफडीआर तकनीक से सड़कों की लागत में और कमी : केशव प्रसाद मौर्य

– उप मुख्यमंत्री ने दी नई दरों को मंजूरी
– बचत से ग्रामीण क्षेत्रों में होंगे अतिरिक्त विकास कार्य

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार

लखनऊ। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से बन रही सड़कों की लागत अब और कम होगी। राज्य के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर किए गए विशेष विश्लेषण और तकनीकी अध्ययन के उपरांत एफडीआर बेस की प्रति घनमीटर लागत में ₹1,000 की कमी का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया है।
उप मुख्यमंत्री ने बताते हुए कहा कि अब तक एफडीआर बेस की लागत ₹3760 प्रति घनमीटर निर्धारित थी, जिसे विशेषज्ञों की सिफारिश पर घटाकर ₹2784 प्रति घनमीटर कर दिया गया है। यह बदलाव उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (UPRRDA) के प्रस्ताव पर उप मुख्यमंत्री द्वारा दी गई स्वीकृति के बाद लागू होगा। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि उच्च गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए लागत में कमी के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी विश्लेषण अनिवार्य है। उन्हीं के नेतृत्व में एफडीआर तकनीक के विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया गया, जिससे यह दर संशोधन संभव हो सका।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन से पीएमजीएसवाई के तहत सड़कों की निर्माण लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे बचत हुई धनराशि का उपयोग अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं, जैसे नई सड़कों के निर्माण और अवसंरचना सुविधाओं के सृजन में किया जा सकेगा।
एफडीआर तकनीक क्या है?
एफडीआर तकनीक एक पर्यावरण अनुकूल और लागत प्रभावी निर्माण पद्धति है, जिसमें पुरानी सड़क सामग्री को फिर से उपयोग में लाया जाता है। इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है, बल्कि निर्माण की गति भी तेज होती है।

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