– एपिड्यूरल तकनीकों में प्रगति के साथ सुरक्षित व मरीज, केंद्रित प्रसव पर केंद्रित कार्यक्रम
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। प्रो0 डॉ0 मोनिका कोहली ने कहा किए श्प्रसव एनाल्जीसिया को प्रसूति देखभाल के नियमित अभ्यास में शामिल करना आवश्यक है ताकि कोई भी महिला सुरक्षितए सम्मानजनक और दर्द मुक्त प्रसव से वंचित न रह जाए, अवसर था किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में लेबर एनाल्जीसिया पर एक दिवसीय मास्टरक्लास का।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा प्रोफेसर डॉ मोनिका कोहली, विभागाध्यक्षए के नेतृत्व में लेबर एनाल्जीसिया पर एक दिवसीय मास्टरक्लास का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक पहल का उद्देश्य प्रसव पीड़ा प्रबंधन के प्रति जागरूकताए समझ और आधुनिक प्रसूति एनेस्थीसिया के संदर्भ में इसकी व्यावहारिक उपयोगिता को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम की विशेष अतिथि डॉ भारती वाधवा प्रोफेसर एनेस्थीसियोलॉजी विभागए मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेजए नई दिल्ली की उपस्थिति ने, जो प्रसूति एनेस्थीसिया की जानी.मानी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने लेबर एनाल्जीसिया में उभरती प्रवृत्तियों पर मुख्य व्याख्यान दियाए जिसमें वॉकिंग एपिड्यूरल और PIEB (प्रोग्राम्ड इंटरमिटेंट एपिड्यूरल बोलस) डिवाइस जैसी नवीनतम तकनीकों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। इस सीएमई में एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लियाए जिनमें डॉ ममता हरजाई, डॉ शिशिर अग्रवाल, डॉ चेतना शमशेरी, डॉ मनोज चैरसिया तथा डॉ कीर्तिका यादव शामिल रहे। प्रमुख वक्ताओं में क्वीन मैरी अस्पतालए केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग से प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ अंजू अग्रवाल और प्रोफेसर डॉ रेनू सिंह भी शामिल थीं।
मास्टरक्लास के प्रमुख विषयों में मातृ अनुभव और प्रसव परिणामों को बेहतर बनाने में लेबर एनाल्जीसिया का महत्व, वॉकिंग एपिड्यूरल जैसी तकनीकें, जो प्रसव के दौरान महिला की सक्रियता को प्रोत्साहित करती हैं, PIEB डिवाइस जैसी नवीन तकनीकें जो एपिड्यूरल एनाल्जीसिया की सटीकता और आराम को बढ़ाती हैं, केस.आधारित चर्चा, और विशेषज्ञ संवाद, जो साक्ष्य आधारित अभ्यास को बढ़ावा देते हैं रहे। कार्यक्रम में 105 प्रतिभागियों (डेलीगेट्स) ने हिस्सा लिया। डेलीगेट्स लखनऊ के 7 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों से थे, साथ ही विभिन्न निजी प्रैक्टिशनर डॉक्टरों और प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं (PMHS) से जुड़े चिकित्सकों ने भी भाग लिया।