वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। रिस्क अनालिसिस तथा अल्पीकरण विधियों हेतु अनुकूलित मार्ग अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि हम सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण तथा अन्य पर्यावरणीय तनाव कारकों से संबंधित जटिल और परस्पर जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हमारे ग्रह पर मानव जीवन का प्रभाव वर्षों से रहा है। परिणामस्वरूप, इससे निपटने के लिए नए समाधान लगातार विकसित हो रहे हैं, ताकि नीति-निर्माण, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा पर्यावरण प्रबंधन के साथ जोखिम मूल्यांकन को एकीकृत करने की वैज्ञानिक और व्यावहारिक चुनौतियों से लड़ा जा सके। उपरोक्त CSIRR-IITR के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ अंकुर गोयल ने कहा।
डॉ अंकुर ने कहा कि वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप, सीएसआईआर भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (CSIRR-IITR ) स्वास्थ्य और पर्यावरण के जोखिम विश्लेषण और अनुवाद पहलुओं में उभरते दृष्टिकोण (अर्थ2024) पर एक अंतर्राष्ट्रीय विषविज्ञान सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह सम्मेलन हमारे संस्थान के हीरक जयंती समारोह की शुरुआत का भी प्रतीक है। जहां एक तरफ पारंपरिक जोखिम आकलन अक्सर सिंगल रिस्क फैक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वर्तमान रणनीति एक अधिक समग्र, प्रणाली-आधारित दृष्टिकोण विकसित करने की है जो परस्पर- संबंधित कई पर्यावरणीय तथा स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखती है। इसमें सामाजिक, आर्थिक तथा पारिस्थितिक कारकों को एकीकृत करना एवं स्वास्थ दृष्टिकोण सुनिश्चित करना शामिल है जो मानव और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के अंतर्संबंध को पहचान सके।
डॉ अंकुर ने कहा कि इस सम्मेलन के विषय वर्तमान महत्व के विविध विषयों को संबोधित करने के लिए तैयार किए गए हैं। जलवायु परिवर्तन जोखिम विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि यह अत्यधिक मौसम, वायु प्रदूषण और संक्रामक रोगों जैसे पर्यावरणीय समस्याओं के जोखिम को बदल देता है। नए मॉडल पर्यावरणीय परिवर्तन के भविष्य के प्रभावों को समझने के लिए जलवायु अनुमानों को स्वास्थ्य जोखिम मूल्यांकन में एकीकृत करते हैं।पहले दो सत्रों के मुख्य विषय ये हैं, अनलिटिकल टूल्स, टेक्नीक्स, एंड एसेस फॉर रिसर्च एंड अडवांसमेंट ऑफ कोंपिटेंसी इन टोक्सिकोलॉजी (अटरैक्ट) तथा रिस्क अनालिसिस टेक्नीक्स एंड एक्सिस्टिंग एंड इमार्जिङ्ग रिस्क (रेट)। पर्यावरण में इंडोक्राईन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (ईडीसी) तथा फार्मास्यूटिकल्स जैसे उभरते प्रदूषकों के विश्लेषण पर ध्यान दिया गया है। ये कांटामिनण्ट्स बहुत कम सांद्रता पर भी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं तथा दीर्घावधि में, विशेष रूप से प्रजनन स्वास्थ्य, तंत्रिका संबंधी विकास और दीर्घकालिक रोगों के संदर्भ में इनके जोखिम का आकलन करने के लिए नए उपकरणों की आवश्यकता होती है। पब्लिक हेल्थ एंड एनवायरनमेंटल टोक्सोकोलोजी (पेट) तथा डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट ऑफ टोकसीकोलोजी फैसिलिटी (डीमैट) शीर्षक वाले दो सत्रों में इन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग के आगमन के साथ, जोखिम विश्लेषण अधिक पूर्वानुमानित और गतिशील मॉडल की ओर बढ़ रहा है जो जोखिमों की वास्तविक समय की निगरानी, संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का पूर्वानुमान और निर्णय लेने में सुधार की अनुमति देता है। डिजिटल इंटरफेस एंड प्रिडिक्टिव टॉक्सिकोलॉजी (डिपटोक्स) सत्र का मुख्य विषय यही होगा।
चार दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य विशिष्ट सत्रों, पैनल चर्चाओं, मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से विभिन्न हितधारकों को शामिल करते हुए उपरोक्त विषयों पर वर्तमान ज्ञान और भविष्य के परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालना है। यह वैज्ञानिक सम्मेलन विश्व भर में कार्यरत विभिन्न विषयों के वैज्ञानिकों तथा शोधार्थियों को एक साथ लाएगा, ताकि उभरते हुए प्रदूषकों के विष विज्ञानध्जोखिमों तथा मानव स्वास्थ्य और सुरक्षित
पर्यावरण पर उनके प्रभावों को समझा जा सके। इसके अतिरिक्त, यह सम्मेलन वैज्ञानिकों तथा युवा शोधार्थियों को विषविज्ञान, जोखिम मूल्यांकन तथा मानव एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने नवीन और नवीनतम निष्कर्षों को साझा करने तथा उन पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।