वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। संविधान को मानव जीवन का मूल आधार बताते हुए कहा कि यह हमारे जीवन को नियमबद्ध बनाता है और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह समाज को समरसता, समानता और विकास की ओर ले जाने वाला पवित्र ग्रंथ है। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लखनऊ विश्वविद्यालय में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
श्री महाना ने कहा कि किसी भी प्रगतिशील समाज या राष्ट्र के लिए नियम और कानून का होना अनिवार्य है। यदि संविधान का पालन न हो, तो समाज में अराजकता फैल सकती है। संविधान मानवता, सत्य और समानता की भावना का प्रतीक है। यदि हम अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे, तो संविधान की मूल मंशा को चरितार्थ कर सकेंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान को एक प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि यह न केवल सरकार चलाने वालों के लिए है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इसे समझे और इसका पालन करे। डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए श्री महाना ने कहा कि उन्होंने समाज की पीड़ा को समझते हुए संविधान में ऐसे प्रावधान किए, जिससे सभी को समान अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों को राजनीति में आकर लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए।
श्री महाना ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य था कि भारत का संविधान लागू हो और देश अपनी कानून व्यवस्था के अनुसार संचालित हो। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने सभी नागरिकों से संविधान पढ़ने और इसके महत्व को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संविधान दिवस मनाने का उद्देश्य जनता को इसके महत्व से अवगत कराना है। इससे पूर्व, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय और राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय गुप्ता ने विधानसभा अध्यक्ष का स्वागत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगान का पाठ किया और संविधान के महत्व पर अपने विचार साझा किए।