वेब वार्ता ( न्यूज एजेंसी) / अजय कुमार वर्मा
लखनऊ। केजीएमयू में एक बच्ची जो ठीक से दूध नहीं पी पा रही थी, उसकी इस दुर्लभ बीमारी का एक सफल ऑपरेशन के बाद इलाज हो सका। अब ७ माह बाद बच्ची ठीक से दूध पी सकेगी।
हरदोई निवासी बिजनेश जो कि अपनी रोजी रोटी के लिए लुधियाना पंजाब में काम करता है। 7 माह पहले उसकी पत्नी दिव्या ने एक बेटी को जन्म दिया। परिवार में ख़ुशी का माहौल था। पर जन्म के बाद जब भी बच्चे को दूध पिलाया जाता था तो उसकी सांस उखाड़ने लगती थी और उसका रंग नीला पड़ जाता था । इस कारण से नवजात शिशु को कई बार छप्ब्न् में भर्ती करना पड़ा। अपने किसी रिश्तेदार की सलाह पर मरीज के माता पिता उसको लेकर बाल विभाग किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में इलाज के लिए लाये । जहां पर लगभग ३ महीना इलाज किया गया और मरीज को नली के द्वारा दूध पिलाया गया। पर मरीज को जैसे ही दूध पिलाया जाता उसको फिर से खांसी आना और न्युमोनिआ जैसे लक्षण होने लगते थे। मरीज की खाने की नली दूरबीन द्वारा जाँच में पता चला की मरीज की खाने की नाली एवं श्वासनाली में जन्म.जात जुड़ाव था। मरीज को सर्जरी के लिए पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग में रेफर किया गया।
पेडियाट्रिक सर्जरी विभाग में प्रोफेसर जिलेदार रावत एवं उनकी टीम ने श्वास नाली की दूरबीन से जाँच कर के खाने की नाली एवं श्वासनाली के जुड़ाव को देखा और मरीज का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन बहुत जटिल था। मरीज की छाती खोल कर खाने की नाली एवं श्वासनाली को अलग किया गया ऑपरेशन के बाद बच्चे को दो दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया। अब बच्चा आराम से दूध पी पा रहा है और उसके माता.पिता बेहद खुश हैं। कुलपति डॉण् सोनिया नित्यानंद ने सर्जिकल टीम को सफलता के लिए बधाई दी।
ऑपरेशन की टीम में प्रोफेसर जिलेदार रावत, डॉ पीयूष कुमार, डॉ प्रीति कुमारी एवं एनेस्थेसिया टीम में डॉ सतीश वर्मा एवं टीम के अन्य नर्सिंग स्टाफ में सिस्टर रीता रहीं।
प्रोफेसर जे डी रावत ने बताया कि टाइप ट्रेकिओसोफेगल फिस्टुला ;ज्म्थ्द्ध बहुत ही दुर्लभ बीमारी है। यह बीमारी १लाख जन्मे बच्चों में से एक बच्चे में होने की सम्भावना होती है। ट्रेकिओसोफेगल फिस्टुला के विभिन्न प्रकारो में ये केवल ४ प्रतिशत बच्चो में पायी जाती है।