वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेटियों के विवाह में आर्थिक सहायता देने की दिशा में बड़ी पहल बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत प्रदेशभर से 1,16,668 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि सरकार ने 72,540 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य रखा है। अब तक 28,833 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि प्राप्त कुल 1,16,668 आवेदनों में से 34,845 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। जांच के दौरान 11,679 आवेदन अपात्र पाए गए हैं, जबकि शेष आवेदनों की स्थिति स्पष्ट होने पर योजना के अंतर्गत आवेदन से स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। योजना का उद्देश्य परिवारों को विवाह के खर्च में राहत देना और बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न कराने में सहयोग करना है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र जोड़े के विवाह पर कुल एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसमें 64 हजार रुपये कन्या के बैंक खाते में गृहस्थी बसाने के लिए दिए जाते हैं। वैवाहिक उपहार सामग्री के लिए 21 हजार रुपये और विवाह समारोह की आवश्यक व्यवस्थाओं पर 15 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य विवाह के दौरान परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना और नवदंपति को नई गृहस्थी शुरू करने में सहयोग देना है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी और ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आय एवं जाति प्रमाणपत्रों का डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए सहायता राशि पात्र लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे भेजी जाती है। अधिकारियों के अनुसार इससे भुगतान में पारदर्शिता बनी है और लाभ सही लाभार्थी तक पहुंचने की प्रक्रिया मजबूत हुई है।
जिलावार आंकड़ों में हरदोई 1,385 जोड़ों के विवाह के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर है। सीतापुर में 1,335, पीलीभीत में 1,271 और आजमगढ़ में 1,242 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है। योजना के तहत विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह में भी सहायता दी जाती है। सरकार का कहना है कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानजनक विवाह का अवसर देने के साथ ही दहेज प्रथा और बाल विवाह को हतोत्साहित करने में भी सहायक है।