वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
हरदोई। जननायक मदारी पासी की जयंती पर शनिवार को हरदोई के भरावन ब्लॉक में भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर लाखन आर्मी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने कहा कि मदारी पासी किसी एक जाति के नहीं, बल्कि सर्वसमाज के रक्षक और योद्धा थे। उन्होंने कहा कि मदारी पासी के विचारों और संघर्ष को देशभर में प्रचारित किया जाना चाहिए। मदारी पासी ने 1921-22 के दौरान अवध में किसानों को मनमाने लगान, बेगार और बेदखली के खिलाफ एका आंदोलन में संगठित किया था।
सूरज पासी ने मदारी पासी के नाम पर बन रहे पार्क और प्रतिमा को लेकर कहा कि उनके योगदान के सम्मान में इतनी छोटी प्रतिमा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि हरदोई में कम से कम 20 से 25 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाए। साथ ही उन्होंने मदारी पासी के परिवार को भारत रत्न से सम्मानित करने और 24 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मदारी पासी के एका आंदोलन को दबाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने बड़ी ताकत का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके योगदान को अब तक उचित सम्मान नहीं मिला।
जनसभा को संबोधित करते हुए सूरज पासी ने पासी समाज से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, जागरूकता और एकता से ही समाज आगे बढ़ेगा। उन्होंने समाज को नशामुक्त रहने और आपसी फूट से बचने का संदेश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार पासी समाज के लोग ही अपने ही समुदाय के व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकते हैं, जो समाज के हित में नहीं है। उन्होंने बताया कि लाखन आर्मी प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित कर रही है और महाराजा कंसा पासी को उचित सम्मान दिलाने का प्रयास कर रही है।
अपने संबोधन में सूरज पासी ने भरावन और भटपुर क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए भारशिव पासियों के इतिहास पर भी चर्चा की। उन्होंने राजा बीरसेन भारशिव पासी और राजा त्रिलोकचंद पासी का जिक्र करते हुए समुदाय की प्राचीन पहचान को रेखांकित किया। धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने एफसीआरए कानून और केरल की ईसाई आबादी का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अंग्रेजों ने आदिवासी समुदायों का विकास हिंदू रहते हुए क्यों नहीं कराया और उनका धर्मांतरण क्यों कराया गया। उन्होंने राम मंदिर निर्माण पर उठने वाली आपत्तियों को लेकर भी सवाल खड़ा किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पासी समाज के लोग शामिल हुए। मंच पर मदारी पासी की प्रतिमा के सामने श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके योगदान को याद किया गया।