वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। क्षमता विकास आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से लखनऊ में साधना श्रृंखला 2026 की तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला का दो दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किया। मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को रणनीतिक और दक्षता-आधारित क्षमता विकास संस्थानों के रूप में विकसित करना था। कार्यशाला 23 और 24 अक्टूबर को लोक भवन में आयोजित हुई।
कार्यशाला का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन दो प्रमुख परिचर्चाएं आयोजित की गईं। पहली परिचर्चा का विषय उन्नति के माध्यम से प्रशिक्षण संस्थानों का रूपांतरण था, जिसकी अध्यक्षता एवं संचालन अपर मुख्य सचिव एवं महानिदेशक श्रीमती श्रेया गुहा ने किया। प्रतिभागियों ने कहा कि उन्नति प्लेटफॉर्म संस्थानों के बीच सहयोग, संकाय सदस्यों की साझा उपलब्धता, पाठ्यक्रम विकास और ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ाकर संसाधनों की कमी से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेगा।
दूसरी परिचर्चा का विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में क्षमता विकास था, जिसका संचालन प्रमुख सचिव एवं महानिदेशक देवराज ने किया। प्रतिभागियों ने सरकारी अधिकारियों में एआई संबंधी दक्षता विकास, शासन में एआई के नैतिक, सुरक्षित और जवाबदेह उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा तथा डेटा संरक्षण के जोखिमों पर ध्यान देने की आवश्यकता रेखांकित की। समापन सत्र में क्षमता विकास आयोग के सचिव जगदीप गुप्ता ने कहा कि नागरिक-केंद्रित शासन के लिए क्षमता विकास अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में तैयार रोडमैप को एकीकृत नवयुगीन राष्ट्रीय प्रशिक्षण पहल उन्नति प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ाया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ता है और संसाधन साझा करने तथा आंकड़ों आधारित सुधार में मदद करेगा। साधना श्रृंखला 2026 मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत क्षमता विकास आयोग की चार क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं की राष्ट्रव्यापी श्रृंखला है। विजयवाड़ा और गुवाहाटी के बाद यह तीसरी कार्यशाला लखनऊ में आयोजित हुई। इसमें बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चंडीगढ़, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में बताया गया कि क्षमता विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शीर्ष स्थान पर है, जबकि राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश के 19.23 लाख पंजीकृत कर्मियों में से लगभग 99 प्रतिशत सक्रिय बताए गए।