वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग की ऑक्यूपेशनल थेरेपी इकाई ने ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स एसोसिएशन के सहयोग से 24 अक्टूबर 2026 को दिव्यांग बच्चों की सहभागिता, आत्मनिर्भरता और समावेशन सुनिश्चित करने हेतु अभिभावकों के सशक्तीकरण विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की। कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों को जागरूक करना, पुनर्वास प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाना और दिव्यांग बच्चों को समाज में सम्मानपूर्वक सहभागी बनाने के उपाय तलाशना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. के.के. सिंह, डीन, फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, केजीएमयू ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार गुप्ता, पूर्व प्रभारी डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव तथा ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पंकज बाजपेयी उपस्थित रहे। प्रो. के.के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास, कार्यात्मक क्षमता विकास और दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में ऑक्यूपेशनल थेरेपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने केजीएमयू में बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी पाठ्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की संख्या बढ़े और पुनर्वास सेवाएं और सुदृढ़ हों।
पैनल चर्चा में डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. आराधना शुक्ला, डॉ. पूजा मल्हौर और डॉ. नितेश कुमार श्रीवास्तव ने बाल्यावस्था की दिव्यांगताओं, बच्चों के समग्र विकास तथा अभिभावकों की भूमिका पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के विकास में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी, सही मार्गदर्शन, नियमित घरेलू अभ्यास, सकारात्मक व्यवहार और परिवार के सहयोग की अहम भूमिका होती है। पैनलिस्टों ने रेखांकित किया कि पुनर्वास का उद्देश्य केवल बच्चे की कठिनाइयों को कम करना नहीं है, बल्कि उसे दैनिक गतिविधियों में स्वतंत्र बनाना, सामाजिक सहभागिता बढ़ाना और घर, विद्यालय तथा समुदाय में समावेश के अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच निरंतर समन्वय से बच्चों के लिए अधिक अनुकूल एवं समावेशी वातावरण तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. नितेश कुमार श्रीवास्तव, डॉ. अरुण कुमार और डॉ. श्रीतोष सोनकर के नेतृत्व में किया गया। इसमें लखनऊ के अनेक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स ने भाग लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि उचित पुनर्वास, सशक्त अभिभावक और समाज के सहयोग से प्रत्येक दिव्यांग बच्चा अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ सकता है।