वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
दिल्ली। शास्त्री भवन में स्थित सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। शास्त्री भवन के प्रस्तावित पुनर्विकास और ध्वस्तीकरण के बीच करीब 8.5 लाख किताबों, पुराने दस्तावेजों और अभिलेखों के सुरक्षित स्थानांतरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर अदालत ने मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ करेगी।
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी लंबे समय से सरकारी पुस्तकों, दस्तावेजों और महत्वपूर्ण अभिलेखों का प्रमुख केंद्र रही है। रिपोर्टों में इसे करीब 135 वर्ष पुराना बताया गया है। शास्त्री भवन के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाइब्रेरी में मौजूद लाखों पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को कहां और किस व्यवस्था के तहत रखा जाएगा। इस मामले को लेकर संस्कृति मंत्रालय की ओर से भी लाइब्रेरी के स्थानांतरण को लेकर चिंता जताए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि सेंट्रल विस्टा योजना में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के लिए स्थान निर्धारित किया गया है और नए परिसर के निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
हालांकि, मौजूदा भवन के ध्वस्तीकरण से पहले लाइब्रेरी के अस्थायी स्थानांतरण, पुस्तकों और पुराने रिकॉर्ड के संरक्षण तथा नए परिसर में स्थायी व्यवस्था को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की सुनवाई में केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से इन व्यवस्थाओं की जानकारी मांगे जाने की संभावना है। लाखों पुस्तकों और पुराने दस्तावेजों की संख्या को देखते हुए उनके सुरक्षित स्थानांतरण और संरक्षण को अहम माना जा रहा है। अदालत यह भी देख सकती है कि शास्त्री भवन के पुनर्विकास के दौरान लाइब्रेरी की सामग्री को नुकसान से बचाने के लिए क्या ठोस योजना तैयार की गई है।