वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अब पोषाहार उत्पादन के जरिए न सिर्फ अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि प्रदेश की पोषण व्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 43 जिलों में संचालित 204 टेक होम राशन (टीएचआर) इकाइयों से करीब 1.15 करोड़ लाभार्थियों तक पोषाहार पहुंचाया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आजीविका के नए अवसर हासिल कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी भागीदारी कर रही हैं। टीएचआर इकाइयों के माध्यम से महिलाओं को नियमित रोजगार और आय का अवसर मिलने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अनुसार, 43 जिलों के 315 विकासखंडों में स्थापित 204 टीएचआर इकाइयों के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभार्थियों के लिए निर्धारित रेसिपी के अनुसार पोषाहार तैयार किया जा रहा है। अब तक इन इकाइयों से 3.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक पोषाहार का उत्पादन कर आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जा चुका है। इन इकाइयों में चार हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं कार्यरत हैं। परियोजना शुरू होने से अब तक उन्हें 70 करोड़ रुपये से अधिक का मानदेय भुगतान किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी बल मिला है।
महिला सशक्तीकरण के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार 46 टीएचआर इकाइयों को सोलर पावर प्लांट से संचालित किया जा रहा है। इन इकाइयों में प्रतिमाह करीब 36.5 लाख रुपये की ऊर्जा लागत की बचत हो रही है। इससे इकाइयों की संचालन क्षमता और आर्थिक स्थिरता मजबूत हो रही है।