वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ ‘भारत टैक्सी’ मॉडल अब प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सहकारी टैक्सी मॉडल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत यात्रियों को बाइक, ऑटो और कैब की सुविधा एक ही व्यवस्था में मिल सकेगी। खास बात यह होगी कि मॉडल में जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग की व्यवस्था प्रस्तावित है।
सरकार की योजना इस सेवा को शहरों के साथ गांवों तक पहुंचाने की भी है। इसके लिए प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, अस्पताल, बाजार और जिला मुख्यालय तक आने-जाने के लिए स्थानीय परिवहन का नया विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
‘भारत टैक्सी’ मॉडल की खासियत यात्रियों के साथ वाहन चालकों को भी व्यवस्था से जोड़ना है। प्रस्तावित सहकारी व्यवस्था में टैक्सी चलाने वाले सारथियों को कारोबार में हिस्सेदार बनाने की अवधारणा रखी गई है। जीरो कमीशन मॉडल के तहत प्रति यात्रा प्लेटफार्म कमीशन की कटौती के बजाय चालकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़कर उनकी आय और भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। यात्रियों के लिए नो-सर्ज प्राइसिंग महत्वपूर्ण होगी। मांग बढ़ने या पीक टाइम में किराये में अचानक वृद्धि से यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है। इससे जरूरी काम से भीड़भाड़ के समय यात्रा करने वालों को किराये में अचानक उछाल से बचने का विकल्प मिलेगा।
सरकार का मानना है कि प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में संगठित टैक्सी सेवा का दायरा बढ़ने से आवागमन आसान होगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर वाहन संचालन से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। लखनऊ और कानपुर में सक्रिय मॉडल को विस्तार देकर प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी है। सरकार जल्द ही इस संबंध में प्रदेशवासियों को औपचारिक रूप से यह सुविधा देने की दिशा में कदम उठाएगी।