वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया तेज हो गई है। शासन स्तर से नियमित मॉनिटरिंग और विशेष अभियानों के चलते धारा-24, 34 और 80 से जुड़े मामलों के निस्तारण में उल्लेखनीय तेजी आई है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच विभिन्न धाराओं में लाखों वादों का निस्तारण किया गया।
सीमांकन और पैमाइश से संबंधित धारा-24 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 28,556 वाद लंबित थे। एक जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच 91,472 नए वाद आए, जिनमें से 39,645 का निस्तारण किया गया। वर्तमान में 80,383 वाद विचाराधीन हैं। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित मामलों की संख्या महज 24 है। प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा में सबसे अधिक वाद विचाराधीन हैं। नामांतरण और दाखिल-खारिज से जुड़े धारा-34 के मामलों में विशेष अभियान का व्यापक असर दिखा है। एक जनवरी से 31 जुलाई के बीच 14,70,133 वाद आए, जिनमें 10,96,814 का निस्तारण हुआ। वहीं 45 दिन से अधिक समय से लंबित नामांतरण वादों के लिए 15 से 25 जून तक चलाए गए विशेष अभियान में 2,21,667 मामलों का निस्तारण किया गया।
भू-उपयोग परिवर्तन से संबंधित धारा-80 के तहत सात माह में 49,855 वादों का निस्तारण हुआ, जबकि 28,797 नए मामले आए। इन मामलों में पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य रही। इसके अलावा धारा-116 के तहत कुर्रा-बंटवारा से जुड़े 22,451 वादों का भी निस्तारण किया गया। शासन का जोर पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने, तकनीक आधारित मॉनिटरिंग बढ़ाने और आमजन को समयबद्ध एवं पारदर्शी राजस्व न्याय उपलब्ध कराने पर है।