वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब शिक्षा सुधारों की दिशा कक्षा-कक्ष में बच्चों के वास्तविक अधिगम और शिक्षकों के अनुभवों के आधार पर तय होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा विभाग ने साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों की नई पहल करते हुए मंगलवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ कार्यक्रम के दौरान टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने की।
कार्यक्रम में निपुण भारत मिशन, परख के निष्कर्षों, प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, कैच-अप लर्निंग, होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा हुई। टीएलपीएस रिपोर्ट में नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर और बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए अध्ययन के आधार पर कक्षा 1 और 2 में भाषा एवं गणित शिक्षण, शिक्षक प्रशिक्षण, कक्षा-कक्षीय वातावरण और अकादमिक सहयोग का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में बच्चों की सीखने की गुणवत्ता को शिक्षा सुधारों का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना बताया गया है।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा सुधार केवल नीतियों से नहीं, बल्कि कक्षा-कक्ष में शिक्षण व्यवहार बदलने से संभव होंगे। उन्होंने 1 जुलाई से शुरू हो रहे स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने, तीन वर्ष से अधिक आयु के सभी बच्चों का बाल वाटिका तथा छह वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने नियमित उपस्थिति, सीखने में पीछे रह गए बच्चों के लिए कैच-अप लर्निंग, निपुण लक्ष्यों की सतत समीक्षा और स्वतंत्र पठन-लेखन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। साथ ही शिक्षक संकुल बैठकों को अनुभव साझा करने और नवाचारों के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच बनाने के निर्देश भी दिए।