वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में 19 से 21 जनवरी 2026 तक आयोजित 86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन संबोधन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य सभा के उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति एवं विधान सभा अध्यक्ष ने भी अपने विचार रखे।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में विधायिकाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए राष्ट्रीय विधायी सूचकांक तैयार किए जाने की घोषणा की, जिसके लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। इससे देशभर के विधानमंडलों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता बढ़ेगी। उन्होंने राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।
सम्मेलन के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने बजट सत्र से पहले सभी दलों के नेताओं और सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि नियोजित गतिरोध और व्यवधान लोकतंत्र के हित में नहीं हैं और इससे सबसे अधिक नुकसान आम नागरिक का होता है। उन्होंने डिसरप्शन के बजाय डिस्कशन और डायलॉग की संस्कृति को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि पीठासीन अधिकारी केवल कार्यवाही संचालित करने वाले नहीं, बल्कि संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक होते हैं। तीन दिवसीय सम्मेलन में 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया और कुल छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए। यह सम्मेलन भारतीय संसदीय लोकतंत्र को और अधिक सुदृढ़ व जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।