वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
कानपुर। आईआईटी कानपुर में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र जयसिंह की आत्महत्या ने एक बार फिर संस्थान में छात्रों पर बढ़ते अकादमिक और प्लेसमेंट दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि बैक पेपर क्लियर न होने के कारण जयसिंह को दो बार प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल होने का मौका नहीं मिला था। बैक पेपर अब तक पास न होने से वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था और इसी तनाव में उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
सूत्रों के अनुसार जयसिंह ने वर्ष 2020 में बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग में बीटेक में प्रवेश लिया था। चार वर्षीय पाठ्यक्रम 2024 में पूरा होना था, लेकिन कुछ विषयों में कमजोर प्रदर्शन के चलते उसके सामने ईयर बैक की आशंका बनी हुई थी। छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद संस्थान प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी एकेडमिक रिपोर्ट तलब की है। पुलिस भी शैक्षणिक और मानसिक दोनों पहलुओं से मामले की जांच कर रही है।
इस वर्ष 2025 में आईआईटी कानपुर में यह चौथी मौत है। इससे पहले दो छात्रों और एक सॉफ्टवेयर डेवलपर की आत्महत्या हो चुकी है। बीते 22 महीनों में संस्थान में आत्महत्या की सात घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे काउंसलिंग और छात्र सहयोग तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। अक्तूबर 2025 में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र धीरज सैनी ने भी आत्महत्या की थी।
आईआईटी प्रशासन का दावा है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। संस्थान में नौ प्रोफेशनल काउंसलर, 24 घंटे की ऑनलाइन हेल्पलाइन, पीयर मेंटरिंग सिस्टम और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र संचालित है। इसके बावजूद लगातार हो रही घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि क्या ये व्यवस्थाएं वास्तव में तनावग्रस्त छात्रों तक समय पर पहुंच पा रही हैं।