वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की गौरवशाली भूमि ने देश को एक नई पहचान दी है। अब वीर सपूतों के साथ-साथ भारतीय नस्ल के कुत्ते भी सीमा की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक रामपुर नस्ल के कुत्तों को अपनी कार्यशक्ति में शामिल कर आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार किया है। रामपुर हाउंड, जो कभी नवाबों के शिकार अभियानों का गौरव था, अब देश की सीमाओं की रक्षा में योगदान देकर राष्ट्र का मान बढ़ा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2018 में बीएसएफ के राष्ट्रीय कुत्ता प्रशिक्षण केंद्र (NTCD), टेकनपुर के दौरे के दौरान भारतीय नस्लों को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया था। इसके बाद 2020 में ‘मन की बात’ में उन्होंने देशवासियों से देशी नस्लों को अपनाने का आह्वान किया। इसी प्रेरणा से बीएसएफ ने उत्तर प्रदेश के रामपुर हाउंड और कर्नाटक के मुधोल हाउंड को अपने परिचालन दल में शामिल किया।
रामपुर हाउंड अपनी तेज रफ्तार, सहनशक्ति और निडरता के लिए जाना जाता है। इसकी नस्ल का उद्गम रामपुर रियासत में हुआ था, जहाँ नवाब इसे शिकार और सुरक्षा के लिए पालते थे। मुधोल हाउंड भी अपनी बहादुरी और फुर्ती के लिए प्रसिद्ध है। बीएसएफ ने इन दोनों नस्लों के प्रशिक्षण, प्रजनन और तैनाती के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए हैं।
आज 150 से अधिक भारतीय नस्ल के कुत्ते बीएसएफ की विभिन्न इकाइयों में तैनात हैं। उन्होंने सीमाओं से लेकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक अपनी दक्षता साबित की है। ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट 2024 में बीएसएफ की मुधोल हाउंड “रिया” ने 116 विदेशी नस्लों को पछाड़कर “बेस्ट इन ट्रैकर ट्रेड” और “बेस्ट डॉग ऑफ द मीट” का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
आगामी एकता दिवस परेड में एकता नगर, गुजरात में बीएसएफ की भारतीय नस्ल के कुत्तों की विशेष टुकड़ी हिस्सा लेगी। यह अवसर न केवल भारत की आत्मनिर्भर के-9 शक्ति का प्रतीक होगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि उत्तर प्रदेश की धरती से उपजी रामपुर हाउंड नस्ल अब राष्ट्र सेवा की अग्रिम पंक्ति में शान से खड़ी है।