वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव श्रीमती मनु कालिया ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में 13 दिसम्बर 2025 को प्रदेशभर में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना रहा। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एवं नालसा के कार्यपालक अध्यक्ष विकम नाथ के मार्गदर्शन में किया गया, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक अरुण भंसाली तथा वरिष्ठ न्यायाधीश एवं कार्यपालक अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
सदस्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1 करोड़ 30 लाख 40 हजार 769 वादों का अंतिम रूप से निस्तारण किया गया। इनमें 1 करोड़ 16 लाख 24 हजार 886 प्री-लिटिगेशन वाद शामिल रहे, जिनका निपटारा न्यायालय में जाने से पहले ही आपसी सहमति के आधार पर कर लिया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न न्यायालयों में लम्बित 14 लाख 15 हजार 883 मामलों का भी समाधान किया गया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आम नागरिकों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का एक प्रभावी मंच है, जहां बिना किसी अतिरिक्त खर्च के विवादों का समाधान किया जाता है। इससे न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि पक्षकारों के बीच आपसी सौहार्द भी बना रहता है। इस व्यापक निस्तारण से यह स्पष्ट होता है कि लोक अदालतें न्यायिक प्रणाली को अधिक सुलभ, सरल और मानवीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।