वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। संविधान दिवस के अवसर पर राजभवन, लखनऊ में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा और मार्गदर्शन में विशेष आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था और संस्थागत कर्तव्य की प्रतिबद्धता का अद्वितीय संगम दिखा. कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ से हुई, जब राजभवन में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने निष्ठा, नीतिपरायणता और कर्तव्यपालन की शपथ ग्रहण की. पूरे परिसर में अनुशासनपूर्ण मौन और संवैधानिक आदर्शों के प्रति सम्मान का भाव प्रवाहित हो रहा था।
कार्यक्रम में महिला अधिकारियों ने भारतीय संविधान निर्माण में महिलाओं के महत्त्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि संविधान सभा की महिला सदस्यों—सरोजिनी नायडू, हंसा मेहता और दुर्गाबाई देशमुख जैसे व्यक्तित्वों ने महिलाओं की समानता, शिक्षा, सम्मान और गरिमा को संवैधानिक अधिकारों के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। संगोष्ठी और संवाद सत्र ने इन ऐतिहासिक प्रयासों की पुनर्स्मृति कराई।
समारोह में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, वीडियो और पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से संविधान निर्माण की प्रक्रिया, प्रमुख अनुच्छेदों, मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों और संविधान निर्माताओं का योगदान विस्तार से साझा किया गया. “हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान” सेल्फी पॉइंट ने सहभागी मन में संविधान से व्यक्तिगत जुड़ाव को और प्रगाढ़ किया. कार्यक्रम का समापन इस दृढ़ संदेश के साथ हुआ कि संविधान की आत्मा को कर्म और आचरण में उतारना ही राष्ट्र सेवा की सच्ची साधना है।