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धर्मध्वजा से रामराज्य की पुनर्ध्वनि और भारत के राजनीतिक भविष्य का संकेत

– राम ध्वजा के साथ जागी अध्यात्म की शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प की लहर
वेब वार्ता ( न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
अयोध्या । अयोध्या राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा फहराते समय का दृश्य केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह ऐसा क्षण था जिसने असंख्य लोगों के हृदय में वर्षों से पनपते भाव, आस्था और प्रतीक्षा को एक साथ जीवन्त कर दिया। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभिजीत मुहूर्त में मंदिर परिसर में पहुंचे, तो वातावरण में अनोखी पवित्रता और उल्लास का संगम दिखाई दे रहा था। साकेत कॉलेज से रामजन्मभूमि तक उनका रोड शो अयोध्या की सड़कों को एक उत्सव में बदल चुका था। स्कूली बच्चों द्वारा बरसाए गए फूल और महिलाओं की आत्मीय मुस्कानें उस ऐतिहासिक पल की गवाही थीं, जो शहर ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का विषय था।
ध्वजारोहण का क्षण विशेष रूप से मन को स्पर्श करने वाला था। अयोध्या राम मंदिर के शिखर पर PM मोदी ने मंगलवार को सुबह 11.50 बजे अभिजीत मुहूर्त में धर्मध्वजा फहराई। PM रामलला के लिए वस्त्र और चंवर लेकर पहुंचे थे। उन्होंने सप्त ऋषियों के भी दर्शन किए, भगवान शेषावतार लक्ष्मण की पूजा की और जलाशय भी देखा। पीएम मोदी ने सियावर राम चंद्र की जय, सियावर राम चंद्र की जय, जय सियाराम का उद्घोषण कर अपने संबोधन की शुरुआत की। कहा, आज संपूर्ण भारत और संपूर्ण विश्व राममय है, रामभक्त के हृदय में आज अद्वितीय संतोष है। अपार अलौकिक आनंद है। पीएम मोदी ने जैसे ही बटन दबाया गया, दो किलो की केसरिया धर्मध्वजा 161 फीट ऊंचे शिखर की ओर बढ़ी और हवा में लहराने लगी, पूरे परिसर में ‘जय श्रीराम’ के जयकारे गूंज उठे। प्रधानमंत्री का भावविभोर होकर हाथ जोड़कर प्रणाम करना उस आध्यात्मिक अनुभव की गहराई को व्यक्त कर रहा था, जिसे शब्दों में बांधना कठिन है। उसी ध्वजा पर अंकित सूरज, ‘ऊँ’ और कोविदार का वृक्ष जैसे सनातन संस्कृति की अमर छाप बनकर दुनिया के सामने उभरे।
मंदिर की पहली मंजिल पर स्थित रामदरबार में मोहन भागवत के साथ की गई पूजा, आरती और रामलला के दर्शन एक शांत, दिव्य और आत्मिक अनुभूति का क्षण थे। स्वर्ण और रेशम के पीतांबर में सजे रामलला, दीपों की छटा और मंत्रों की अनुगूंज में जैसे शताब्दियों की प्रतीक्षा का उत्तर दे रहे थे। मोदी ने राम मंदिर परिसर को देखा। सप्त ऋषियों के दर्शन किए। भगवान शेषावतार की भी पूजी की। मोहन भागवत के साथ PM मोदी ने पहली बार रामदरबार में पूजा की और आरती उतारी।
शहर में फैले सांस्कृतिक कार्यक्रम, शंखध्वनि, साधु-संतों का स्वागत और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की आंखों में दिखता भाव इस बात का प्रमाण थे कि आज केवल एक ध्वजा नहीं फहराई गई, बल्कि आस्था की वह लौ प्रज्वलित हुई है जिसने पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांध दिया। प्रधानमंत्री के संबोधन में बार-बार प्रकट हुआ भाव, कि सदियों के घाव भर गए और मानसिक गुलामी की जंजीरें टूटीं, हर सुनने वाले के मन में गूंज पैदा करता गया।
यह दिन केवल अयोध्या या उत्तर प्रदेश के इतिहास का नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का एक स्वर्णिम अध्याय बन गया। जब अंत में प्रधानमंत्री ने जय सियाराम का उद्घोष किया, तो ऐसा लगा मानो हर हृदय उसी स्वर में धड़क रहा हो। यह केवल ध्वजा का आरोहण नहीं था, बल्कि एक नई चेतना, नए संकल्प और नए भारत का उद्घोष था।
राम मंदिर के शिखर पर 22 फीट लंबी और 11 फीट चौड़ी धर्मध्वजा लहरा रही है। धर्मध्वजा को गुजरात के 6 कलाकारों ने 25 दिन में बनाया है। धर्मध्वजा 10 फीट ऊंची और 20 फीट लंबी है। इसमें भगवान राम की वीरता का प्रतीक चमकता हुआ सूरज, ‘ऊँ’ का निशान और कोविदार का पेड़ है। रामलला की सुबह की आरती की गई। रामलला ने सोने और रेशम के धागों से बने पीतांबर वस्त्र धारण किए हैं। यह पोशाक डिजाइनर मनीष तिवारी ने बनाई है।
लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने राम जन्मभूमि को प्रणाम किया। रामपथ पर जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे। डीजे की धुन पर कलाकार नृत्य कर रहे थे। साधु-संतों ने शंख बजाकर पीएम मोदी का वेलकम किया। PM मोदी अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचे तो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और CM योगी ने उनका स्वागत किया। अयोध्या पहुंचे मेहमानों के स्वागत के लिए जगह-जगह फूलों से स्लोगन लिखे हैं। महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ उत्तर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने मंत्र उच्चारण कर PM मोदी का स्वागत किया। योगी बोले- पीढ़ियों की प्रतीक्षा साकार हुई। अयोध्या राम मंदिर पर फहराई धर्मध्वजा, मोदी भावुक हुए:बोले- अब मानसिक गुलामी से मुक्ति का लक्ष्य; इसने राम को भी काल्पनिक बता दिया। अयोध्या का राम मंदिर आज संपूर्ण हो गया। प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिनों बाद PM मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण किया। सुबह 11.50 बजे अभिजीत मुहूर्त में बटन दबाते ही 2 किलो की केसरिया ध्वजा 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहरने लगी।
पहले चर्चा थी कि ध्वजारोहण समारोह के लिए अमिताभ बच्चन समेत कई सेलिब्रिटीज को न्योता भेजा गया है, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। चारों शंकराचार्यों को छोड़कर देशभर के मठों के संत मंदिर परिसर में मौजूद रहे। शहर को 1000 क्विंटल फूलों से सजाया गया। मंदिर में 5-लेयर सुरक्षा रही। ATS, NSG, SPG, CRPF और PAC के जवान तैनात रहे। रामलला ने आज सोने और रेशम के धागों से बने पीतांबर वस्त्र धारण किए। पीएम मोदी ने करीब 32 मिनट भाषण दिया। पीएम मोदी ने कहा- हर कालखंड में राम के विचार ही हमारी प्रेरणा बनेगा। विकसित भारत की यात्रा को गति देने के लिए ऐसा रथ चाहिए, जिसके पहिये शौर्य और धैर्य हों। ऐसा रथ जिसकी ध्वजा नीति, नीयत से समझौता नहीं करे। ऐसा रथ जिसके घोड़े बल, विवेक, संयम और परोपकार हो। ऐसा रथ जिसकी लगाम क्षमा, करुणा और संभाव हो, जहां सफलता का अंहकार नहीं, असफलता में भी दूसरों के प्रति सम्मान बना रहे। यह पल कंधे से कंधा मिलाने का है, यह पल गति बढ़ाने का है। हमें वह भारत बनाना है जो रामराज्य से प्रेरित हो, यह तब ही संभव है स्वयं से पहले राष्ट्र हित होगा।

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