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विज्ञान एवं सतत विकास का संगम: CSIR–IITR में ‘अर्थ 2025’ सम्मेलन का भव्य उद्घाटन

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। सीएसआईआर–भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (CSIR–IITR) में गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अर्थ 2025 – इमर्जिंग अप्रोचेज इन रिस्क एनालिसिस एंड ट्रांसलेशनल एस्पेक्ट्स ऑफ हेल्थ एंड एनवायरनमेंट’ का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में भारत एवं विदेशों से वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरणीय स्वास्थ्य, विषविज्ञान और सतत विकास के क्षेत्रों में नवीनतम अनुसंधान और समाधान पर विचार-विमर्श करना रहा।
उद्घाटन समारोह का आरंभ वैज्ञानिक प्रदर्शनी से हुआ, जिसमें विश्लेषणात्मक और विषविज्ञान अनुसंधान में हुई नवीन प्रगतियों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर डॉ. रवि राम कृष्टिपटी ने ‘अस्त्र फेलोशिप’ की घोषणा की, जिसे डॉ. भास्कर नारायण, निदेशक, CSIR–IITR , ने प्रदान किया। यह सम्मान डॉ. मिरो स्म्रिगा (जापान), डॉ. कट्टेश वी. कट्टी (अमेरिका) और एन. वेंकटेश्वरन (भारत) को दिया गया।
CSIR–IITR और वॉटर्स इंडिया के बीच एक एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ, जो पर्यावरण विषविज्ञान में अनुसंधान व नवाचार को प्रोत्साहित करेगा। टी. अनिल कुमार ने उद्योग–शैक्षणिक सहयोग के महत्व पर बल देते हुए पोस्टर सत्र का वर्चुअल उद्घाटन किया।
मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार, अध्यक्ष, एएसआरबी, ने जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य जोखिमों पर केंद्रित विचार साझा किए। उन्होंने एआई-संचालित विषविज्ञान, रियल-टाइम बायोमॉनिटरिंग और नीति-उन्मुख अनुसंधान की आवश्यकता बताई।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. भास्कर नारायण ने कहा कि “अर्थ 2025” सतत विकास के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति को एकीकृत करने वाला मंच है। कार्यक्रम का समापन डॉ. क़ौसर महमूद अंसारी के धन्यवाद ज्ञापन और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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