वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
आगरा। नगर निगम आगरा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठेकेदार कंपनी एसआरएस एक्सप्रेस को एक ही अनुबंध के आधार पर दो अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इन प्रमाण पत्रों का उपयोग विभिन्न विभागों में करोड़ों के सरकारी ठेके हासिल करने के लिए किया गया। स्मार्ट सिटी कार्यालय से जारी अनुभव पत्रों का इस्तेमाल अलग-अलग परियोजनाओं में किया गया, जिनमें 113 करोड़ रुपये के काम भी शामिल हैं। इस मामले में अनुभव पत्र की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। फर्जी अनुभव के आधार पर ऊर्जा, विद्युत, पेयजल और स्वच्छता से जुड़े ठेके मिलने के आरोप लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, निगम अधिकारियों की मिलीभगत से एक ही फर्म को नगर निगम के साथ-साथ अन्य विभागों में भी टेंडर दिलवाने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ताओं ने निगम के अफसरों पर भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप लगाए है। निगम द्वारा एक ही अनुबंध पर आधारित दो अलग-अलग अनुभव प्रमाण पत्र जारी करना प्रशासनिक प्रक्रिया में खामियों की बड़ी मिसाल है। ये दस्तावेज सामान्यतः ठेकेदारों की योग्यता और कार्य अनुभव प्रमाणित करने के लिए जारी किए जाते हैं, ताकि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन जब इन्हीं प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर करोड़ों की परियोजनाएं हासिल की जाती हैं, तो यह सरकारी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। इस प्रकरण से यह भी स्पष्ट होता है कि नगर निगम की स्मार्ट सिटी शाखा के साथ-साथ तकनीकी और लेखा परीक्षक इकाइयों की अनुश्रवण व्यवस्था कमजोर है। यदि नियंत्रण सही होता, तो एक ही अनुभव पत्र से अलग-अलग विभागों में टेंडर हासिल करना संभव नहीं होता। ऐसी घटनाओं का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को होता है। ठेकेदारों द्वारा योग्यता रहित तरीके से ठेके हासिल करने पर विकास कार्यों की गुणवत्ता में गिरावट आती है। पानी, बिजली, सड़क या स्वच्छता जैसी सेवाओं में जनता को अपेक्षित सुधार नहीं देखने को मिलता। इसके अलावा, ईमानदार कंपनियों और इंजीनियरों के बीच निराशा और प्रतिस्पर्धा में असमानता पैदा होती है।