Breaking News

सीवर की सफ़ाई में जान गंवाने वाले की मौत नहीं हत्या होती है और इस हत्या की ज़िम्मेदारी सरकार किसकी तय करेगी ? -अनुपम मिश्रा

वेबवार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 2 अगस्त। टीम -आर एल डी के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम मिश्र ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर दिनांक 25 जुलाई, 2023 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले द्वारा लोक सभा में जो सूचना दी गई उस पर अपना दु:ख व क्षोभ प्रगट करते हुर कहा कि आज़ादी के इतने वर्षों के बाद विकास के तमाम कपोल कल्पित दावों के बाद आज़ादी के अमृत काल में भी यदि यह कुप्रथा जारी है तो विश्व के सबसे बडे लोकतान्त्रिक राज्य के लिये इससे अधिक शर्मनाक व ह्रदय विदारक घटना और क्या हो सकती है ?
सरकारी दावो की यदि माने तो पिछले पाँच वर्षों में सीवर एवं सेप्टिक टैंकों की सफ़ाई करते समय केवल 399 लोग मौत के मुँह में समाए है साथ ही देश के 236 ज़िलों में मैला ढोने की प्रथा हैं वह भी तब जब संसद द्वारा वर्ष 2013 में पारित एक प्रस्ताव के अंतर्गत दिसंबर 2014 में क़ानून बन चुका है कि हाथ से मैला उठाना तथा बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों व उपकरणों के सेफ़्टी टैंक में जाना प्रतिबंधित है जिसके लिए 21सूत्री दिशा निर्देश भी निर्गत किये गये थे बावजूद इसके यदि यह अमानवीय कुप्रथा क़ायम है और लोग इस घ्रनित कार्य को करते हुए इतनी भयानक मौत मर रहे हैं तो आख़िर इसका ज़िम्मेदार कौन है?
उन्होने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 2014 के आदेश के अनुसार सीवर सेप्टिक टैंक में मरने वाले लोगों के परिजनों को दस लाख रुपया का मुआवज़ा दिया जाना चाहिए पर सत्यता यह है की 1315 लोगों में से केवल 266 मृतकों के परिजनों को ही यह सहायता राशि दी गई है यानी 80प्रतिशत से अधिक लोगों को अभी भी यह राशि नहीं दी गई है।

Check Also

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: 15 मौतों वाली इमारत जल्द होगी ध्वस्त, एलडीए के अल्टीमेटम के बचे पांच दिन

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार लखनऊ। राजधानी के अलीगंज सेक्टर-डी में 22 जून को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Updates COVID-19 CASES