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सेंधा नमक – अमृत समान तो काला नमक – पाचक और रोगनाशक, आइये जानें क्या कहता है आयुर्वेद

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी) / अजय कुमार
लखनऊ। आयुर्वेद में सेंधा नमक को सर्वोत्तम नमक माना गया है। इसे संस्कृत में सौवर्चल लवण कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से पर्वतीय खानों और सूखी झीलों से निकाला जाता है। इसकी प्रकृति शीतल, मधुर और सहज पचने वाली बताई गई है।
आयुर्वेद के अनुसार सेंधा नमक त्रिदोषों—वात, पित्त और कफ—को संतुलित करता है। यह विशेष रूप से वात संबंधी विकार जैसे जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और नसों की कमजोरी में लाभकारी है। पित्त दोष से होने वाली अम्लता और पाचन की गड़बड़ी में भी यह संतुलनकारी माना गया है। कफ दोष के कारण उत्पन्न श्वसन संबंधी रोगों में भी यह उपयोगी सिद्ध होता है। सेंधा नमक का नियमित सेवन भोजन को स्वादिष्ट और सुपाच्य बनाता है। यह भूख बढ़ाता है, पाचन शक्ति को सुधारता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह हृदय को बल देता है, रक्त संचार को दुरुस्त रखता है और मानसिक तनाव को कम करता है। इसके औषधीय प्रयोग भी विविध हैं। मांसपेशियों की जकड़न में सेंधा नमक को गुनगुने पानी में मिलाकर पीना लाभकारी होता है। त्वचा रोगों में सेंधा नमक के पानी से स्नान करने की सलाह दी जाती है। आर्थराइटिस और हड्डियों की कमजोरी में इसका उपयोग हड्डियों और तंतुओं को मजबूती प्रदान करता है।
सारतः सेंधा नमक केवल व्रत का ही आहार नहीं, बल्कि आयुर्वेद में इसे शरीर और मन की संतुलनकारी औषधि माना गया है।

काला नमक : आयुर्वेदिक दृष्टि से पाचक और रोगनाशक
काला नमक को आयुर्वेद में सौवर्चल लवण का ही एक रूप माना गया है, लेकिन इसकी प्रकृति सेंधा नमक से भिन्न है। यह ठंडी, तीक्ष्ण और रेचक (लैक्सेटिव) मानी गई है। इसका स्वाद कटु, लवणीय और कुछ कसैला-सा होता है।
काला नमक विशेष रूप से पित्त और कफ दोष को संतुलित करता है। यह पाचन क्रिया को तीव्र करता है, भूख बढ़ाता है और आंतों की जकड़न को खोलता है। आयुर्वेद के ग्रंथों में इसे कब्ज, गैस, अम्लपित्त (एसिडिटी), सीने की जलन और मंदाग्नि (कमजोर पाचन) के लिए औषधीय बताया गया है। इसमें प्रचुर मात्रा में लौह तत्व पाया जाता है, जो शरीर में रक्त की कमी को दूर करने में मदद करता है। सल्फर की मौजूदगी इसे गैस और पेट की गड़बड़ी का त्वरित इलाज बनाती है। काला नमक ही वह तत्व है जो चाट, रायते और सलाद को न सिर्फ स्वादिष्ट बल्कि पाचक भी बनाता है। आयुर्वेद में इसका प्रयोग अनेक औषधियों में होता है। हिस्टीरिया, गोइटर, मंद दृष्टि (कम दिखाई देना) जैसी समस्याओं में भी काला नमक सहायक माना गया है। नींबू रस के साथ काला नमक लेने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं और उल्टी की समस्या रुक जाती है। आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि काला नमक केवल मसालों का हिस्सा नहीं, बल्कि यह शरीर को रोगों से बचाने वाला प्राकृतिक पाचक औषधि है।
साधारण नमक जहां ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, वहीं काला नमक कम सोडियम होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प है।
👉 इस तरह आयुर्वेद में सेंधा नमक को संतुलनकारी और पोषणदायी माना गया है, जबकि काला नमक को पाचक और रोगनाशक के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।

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