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उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्णन की ऐतिहासिक जीत, क्रॉसवोटिंग से विपक्ष को बड़ा झटका

– NDA कैंडिडेट के पक्ष में 14 सांसदों ने की क्रॉसवोटिंग
– चुनाव में अमान्य वोटों की संख्या भी चर्चा का विषय रही
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कुल 452 वोट हासिल कर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी बी सुदर्शन रेड्डी को हराया। रेड्डी को 300 वोट मिले। इस प्रकार एनडीए उम्मीदवार ने आवश्यक 392 वोटों से कहीं अधिक मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। संसद परिसर में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले मतदान में कुल 767 सांसदों ने वोट डाले, जिनमें से 15 वोट अमान्य पाए गए। कुल 782 सांसद इस चुनाव में मतदान करने के योग्य थे।
इस जीत में सबसे अहम भूमिका विपक्षी खेमे से हुई क्रॉसवोटिंग ने निभाई। बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि 14 सांसदों ने विपक्ष छोड़कर एनडीए उम्मीदवार को वोट दिया। यह एनडीए की रणनीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है। विपक्षी दलों से मिले अतिरिक्त वोटों और वायएसआर कांग्रेस के समर्थन ने एनडीए को निर्णायक बढ़त दिलाई। एनडीए की संख्या पहले से ही 427 थी, वायएसआर कांग्रेस के 11 सांसदों को मिलाकर यह 438 हो गई और उस पर 14 क्रॉस वोट मिलकर कुल आंकड़ा 452 तक पहुंच गया।
यह चुनाव उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद आयोजित किया गया। विपक्ष ने एकजुटता का संदेश देने के लिए बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा था। विपक्ष को उम्मीद थी कि वह मजबूत चुनौती देगा, लेकिन एनडीए की रणनीति और संख्याबल के सामने उनकी कोशिशें नाकाम हो गईं। सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि उन्होंने सांसदों से अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट करने की अपील की थी, जिसके चलते कुछ क्रॉसवोटिंग हुई।
चुनाव में अमान्य वोटों की संख्या भी चर्चा का विषय रही। 15 वोट इनवैलिड पाए गए, जो कुल डाले गए मतों का लगभग 2 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह या तो तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ या फिर सांसदों ने जानबूझकर वोटों को अमान्य किया। इस स्थिति ने साफ किया कि भविष्य में ऐसे चुनावों में सांसदों को मतदान की प्रक्रिया पर और बेहतर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।
एनडीए की इस जीत ने जहां उपराष्ट्रपति पद पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, वहीं विपक्षी गठबंधन को यह चुनावी झटका गहरी रणनीतिक कमजोरी का संकेत भी देता है। यह नतीजा आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर भी दूरगामी असर डाल सकता है।

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