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ताइवान संग औद्योगिक सहयोग बढ़ाने की तैयारी, उत्तर प्रदेश एफडीआई का नया गढ़ बनने को तैयार

– उत्तर प्रदेश बनेगा हाई-टेक विनिर्माण का हब
– सेमीकंडक्टर और डाटा सेंटर में ताइवान संग बढ़ेगा सहयोग
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने और अधिक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से आज इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में ताइवान के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर और उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नए अवसरों पर मंथन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद ने की। इसमें प्रमुख वैश्विक उद्योग प्रतिनिधि और ताइवान विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें सुरेश चंद्र (निदेशक, एसटीक्यूसी), सुरेश कुमार तुल्लुरी (सीईओ, सुपरमाइक्रो), संजीव मेहता (सह-संस्थापक एवं वैश्विक सीईओ, आकाशावर्स) और प्रो. नचिकेत तिवारी (आईआईटी कानपुर) प्रमुख रहे।
बैठक में संयुक्त उपक्रमों, निवेश अवसरों और दीर्घकालिक सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ। ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में वैश्विक नेतृत्व क्षमता तथा उत्तर प्रदेश की डाटा-प्रधान क्षेत्रों में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग मॉडल पर मंथन किया। इन्वेस्ट यूपी ने इस दिशा में ताइवान डेस्क की स्थापना की है, जो नई परियोजनाओं को सुगम बनाएगा और एफडीआई/एफसीआई तथा फॉर्च्यून ग्लोबल-500 निवेश प्रोत्साहन नीति 2023 जैसी अग्रणी नीतियों के तहत निवेशकों को सहयोग उपलब्ध कराएगा। जल्द ही उत्तर प्रदेश का एक प्रतिनिधिमंडल ताइवान का दौरा करेगा, ताकि व्यापार और निवेश संबंध और प्रगाढ़ किए जा सकें।
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की प्रतिस्पर्धी विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला गया। खासकर वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) हब के रूप में नोएडा, लखनऊ, आगरा और कानपुर जैसे शहरों की उपलब्ध वाणिज्यिक भूमि, विश्वसनीय बिजली-पानी, मानव संसाधन और नीतिगत सहयोग ने राज्य को एशिया में डाटा सेंटर संचालन के लिए सबसे किफायती गंतव्य बना दिया है।
इन्वेस्ट यूपी ने ताइवान की कंपनियों को आकर्षक प्रोत्साहन और निवेश-अनुकूल माहौल का आश्वासन दिया। प्रतिभागियों ने यूपी की तेज़ी से भारत के अग्रणी जीसीसी हब के रूप में उभरने की सराहना की और कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, मजबूत अवसंरचना और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसी परियोजनाओं से यह संभव हुआ है।
चर्चा के दौरान सेमीकंडक्टर, बायोप्लास्टिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस और उन्नत तकनीकों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। बैठक का समापन इस प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि उत्तर प्रदेश और ताइवान दीर्घकालिक सहयोग से औद्योगिक विकास और वैश्विक नवाचार में रणनीतिक साझेदार बनेंगे।

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