वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। भाकृअनुप-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ ने गुरुवार को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया। वर्ष 1972 में स्वर्गीय पद्मश्री डॉ. के. एल. चड्ढा के नेतृत्व में केंद्रीय आम अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित इस संस्थान ने भारतीय बागवानी में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस अवसर पर आईसीएआर के उप महानिदेशक (बागवानी विज्ञान) प्रो. एस. के. सिंह ने डॉ. चड्ढा की प्रतिमा का अनावरण किया और संस्थान के सभागार को उनके नाम से समर्पित किया।
अपने संबोधन में प्रो. सिंह ने संस्थान की उपलब्धियों—उन्नत किस्मों का विकास, आम निर्यात प्रोटोकॉल, डिजिटल बाग स्वास्थ्य कार्ड, स्मार्ट बाग प्रबंधन और कटाई-पश्चात प्रौद्योगिकी—की सराहना की। उन्होंने शून्य-अपशिष्ट बागवानी, बहु-वस्तु क्लस्टर और पोषक तत्व-कुशल उत्पादन प्रणालियों पर बल दिया। डॉ. वी. बी. पटेल, अतिरिक्त महानिदेशक (फल एवं बागान फसलें), ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जलवायु-अनुकूल किस्मों और स्मार्ट बाग प्रबंधन की आवश्यकता बताई।
संस्थान के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन ने नई किस्मों के विमोचन, कैनोपी प्रबंधन, डिजिटल बागवानी, विल्ट प्रबंधन और अच्छी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने जैसी उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। इस मौके पर सीआईएसएच की नई वेबसाइट, डिजिटल बाग स्वास्थ्य कार्ड और तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन हुआ। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फल उत्पादन, स्नातकोत्तर शिक्षा और लाइसेंसिंग को लेकर कई एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, किसानों, अधिकारियों और छात्रों ने भाग लिया और स्थायी बागवानी को आगे बढ़ाने तथा विकसित भारत के विजन को साकार करने का संकल्प लिया।