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लोहे के पाइपों के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही थी शराब की भारी खेप, दो तस्कर गिरफ्तार

— सिग्नल ऐप के जरिए संचालित हो रहा था काला कारोबार, बिहार में बिकती थी तीन गुना कीमत पर शराब
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने शराब तस्करी के एक अत्यंत शातिर तरीके का भंडाफोड़ किया है। गोसाईगंज थाना पुलिस ने एक डीसीएम वाहन से 14,484 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब (कुल 4,961 लीटर) बरामद की है। शराब को लोहे के पाइपों के नीचे इस तरह छिपाया गया था कि पहली नजर में किसी को संदेह भी न हो। इस सिलसिले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान दिनेश परमार (ड्राइवर) और जगदीश (क्लीनर), निवासी खांचरोद, उज्जैन (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है।
गिरफ्तार तस्करों ने बताया कि वे यह खेप पंजाब से बिहार ले जा रहे थे। डीसीएम वाहन (UP23BT0307) लखनऊ निवासी विनय कुमार मिश्रा का है, जिसे आरोपी रोहतास नामक व्यक्ति ने रेंट एग्रीमेंट पर लिया था, लेकिन बाद में न तो वाहन लौटाया और न ही भुगतान किया।वाहन के ऊपर रखे गए 10 टन के लोहे के पाइपों के नीचे 1.5 फीट लंबे वेल्डेड पाइपों में शराब की बोतलें छिपाकर रखी गई थीं। पुलिस को गाड़ी के दस्तावेज भी कूटरचित मिले हैं, जिनमें दिल्ली के आर.के. इंटरप्राइजेज से असम के विपिन इंटरप्राइजेज के नाम से लोहे के पाइपों की फर्जी बिलिंग दिखाई गई थी। तस्करों ने पूछताछ में बताया कि वे पूरे नेटवर्क में संपर्क और निर्देश “सिग्नल” मोबाइल ऐप के माध्यम से प्राप्त करते थे। यह ऐप पूरी तरह सुरक्षित होता है और इसमें डेटा सर्वर पर सेव नहीं होता, जिससे उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
यह शराब केवल चंडीगढ़ में बिक्री के लिए अधिकृत थी, बिहार राज्य में शराबबंदी का कानून लागू है, लेकिन वे इसे बिहार में ले जाकर MRP से तीन गुना कीमत पर बेचते थे। अनुमान के अनुसार, यह खेप बिहार में ₹1 करोड़ से अधिक की कीमत पर बेची जाती।

आगे की जांच जारी :
डीसीपी निपुण अग्रवाल ने बताया कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और इसमें शामिल अन्य तस्करों, शराब भेजने वाले और खरीददारों की तलाश की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा। यह गिरोह हर राज्य में डीसीएम की नंबर प्लेट और आरसी बदल देता था, ताकि किसी को शक न हो। यह एक संगठित तस्करी सिंडिकेट का हिस्सा लग रहा है, जिसकी कड़ियां देश के कई राज्यों से जुड़ी हो सकती हैं।
क्या है सिग्नल एप, जिस पर चल रहा काला कारोबार :
सिग्नल एप एक सुरक्षित एप है जो वॉट्सऐप की तरह ही है। इसमें किसी दूसरे सिग्नल एप यूजर को मैसेज भेज सकते हैं और चैट कर सकते हैं। साथ ही ग्रुप भी बना सकते हैं। इसकी खासियत है कि यूजर का डाटा क्लाउड सर्वर में स्टोर नहीं होता है। इसमें वीडियो और वाइस कॉल भी कर सकते हैं। यूजर्स की बातचीत सुरक्षित रहती है। सिग्नल को दुनियाभर में कई लोग अपनी बातचीत को निजी रखने के लिए उपयोग करते हैं।

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