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मोदी सरकार के ग्यारह वर्ष का कार्यकाल देश के लिए पूरी तरह से निराशाजनक व राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए आघात पहंुॅुचाने वाला: प्रमोद तिवारी, सांसद

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। प्रमोद तिवारी, सांसद, उप नेता राज्य सभा ने मोदी सरकार के ग्यारह वर्ष के कार्यकाल को देश के लिए पूरी तरह से निराशाजनक व राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए आघात पहंुॅुचाने वाला बताया है। उन्होने कहा है कि इन ग्यारह वर्षो के कार्यकाल में केन्द्र की मोदी सरकार की अर्थनीति, विदेश नीति, सुरक्षा नीति तथा राष्ट्रीय आय तथा विकास से जुडी योजनागत नीति पूरी तरह से नाकाम रही है। इन ग्यारह वर्षो में दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद की बनायी गयी एक भी परियोजना न खुद ला सके और न ही स्वयं उसे पूरा ही कर सके।
श्री तिवारी ने भाजपा के विकास के दावो पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा है कि कडवा सच तो यह है कि इन पूरे ग्यारह वर्षो में मोदी जी देश की लकीर की जगह खुद की अपनी लकीर बड़ा करने में आत्ममुग्ध नेतृत्व का ढ़िढोरा पीटते आ रहे हैं। यही नहीं ग्यारह वर्षो का मोदी सरकार का कार्यकाल संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के साथ ही साथ संविधान तक को बदलने की खतरनाक कुचेष्टा का कड़वा कार्यकाल ही है। लडखड़ाती अर्थव्यवस्था के चलते मंहगाई और बेरोजगारी की लगातार बढ़ोत्तरी से देश बर्बादी तथा तबाही के मुकाम पर पहंुॅच गया है। नोटबंदी के कारण देश का आर्थिक ढांचा कमजोर हुआ। डाॅलर के मुकाबले रूपये का सौ रूपये के आंकड़े के समीप पहंुॅचना अन्र्तराष्ट्रीय बाजार में मोदी सरकार की साख पर बटटा लगा गया है।
श्री तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल मे भाजपा ने संविधान तक बदलने का मंसूबा पाल रखा था किन्तु देश की जनता ने सशक्त विपक्ष के लिए जनादेश देकर संविधान को लेकर इस खतरनाक इरादे को धूल चटा दी। उन्होंने ने कहा कि जातिगत जनगणना के लिये आदरणीय श्री राहुल गांधी जी, नेता प्रतिपक्ष लोक सभा के नेतृत्व में विपक्ष की मजबूत आवाज के सामने मोदी सरकार को घुटने टेकने पड़े, इसके बावजूद जातिगत गणना को लेकर मानक में मोदी सरकार अभी तक पारदर्शिता सामने नहीं ला सकी है।
श्री तिवारी ने पहलगाम (जम्मू काष्मीर) में आतंकी हमले के लिये भी मोदी सरकार की विदेश नीति को देश के इतिहास की सबसे अपरिपक्व विदेश नीति बताया है। उन्होने कहा कि देश की बहादुर और जाॅबाॅज सेना दुश्मन देश को माकूल जबाब दे रही थी ऐसे में अमेरिका के निर्देश पर चार दिन में ही मोदी सरकार ने सीजफायर की घोषणा कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टंªप ने सीजफायर के समय भारत और पाकिस्तान को एक तराजू पर रखते हुए व्यापार को मुददा बनाकर अपना बयान रोज दोहरा रहे हैं। इससे अन्र्तराष्ट्रीय क्षेत्र में भारत की छवि खराब हुई है।
श्री तिवारी ने कहा कि भारत पं. जवाहर लाल नेहरू, स्व. इंदिरा गांधी और स्व.अटल बिहारी बाजपेयी जी के प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का मजबूत नेता होने की छवि रखता रहा। किन्तु पाकिस्तान के साथ हालिया सैन्य टकराव में खराब विदेश नीति के चलते एक सौ तीन राष्ट्रों के नेता रहे भारत के साथ पडोसी नेपाल तक का खड़ा न होना सबसे ज्यादा पीड़ादायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि मा. प्रधानमंत्री मोदी जी चीन के सामने आखिर क्यूं चुप हो जाते हैं ? चीन द्वारा भारतीय भूभाग को अपने नक्शे में रोज नाम परिवर्तित किये जाने का घिनौना प्रयास किया जाता है।
उन्होने कहा कि व्यापार के क्षेत्र में भी चीन आयात के जरिए चिन्ताजनक अनुपातिक बढ़त लिए हुए है। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार की पराकाष्ठा की हद तक दुखद हिंसक घटनाएं हुई। किन्तु उस समय भी विश्वगुरू मोदी जी को बांग्लादेश की हिंसक घटनाओं में अल्पसंख्यक भारतीयों की तहस नहस हो रही दुर्दशा पर भी कुछ भी बोलने में सांप सूंघ गया था।
श्री तिवारी ने कहा कि सीमावर्ती संवेदनशील राज्य मणिपुर में भाजपा की राज्य सरकार को पूरी तरह से आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में विफलता हाथ लगी है। मौजूदा समय में राष्ट्रपति शासन के बावजूद मणिपुर में जारी हिंसा का दौर केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के बड़बोलेपन की बखिया उधेड़ रहा है। प्रधानमंत्री तथा भाजपा को इन ग्यारह वर्षो के कार्यकाल में देश की जनता के प्रति जबाबदेह होने की फुर्सत नहीं मिली। कड़वी सच्चाई यह है कि मोदी सरकार विकास तथा सुरक्षा व गरीबी रेखा के मानक को कम करने के क्षेत्र में भी असफलता के बावजूद खोखले आधार पर देश से बढ़कर अपनी छवि ऊपर रखने की कोशिश में जुटी हुई है।
उन्होने कहा कि आजादी के बाद यह पहली मोदी नीति सरकार है, जिसके कार्यकाल में हर मोर्चे पर विफलता पर विफलता का खामियाजा देष की जनता भुगत रही है। प्रधानमंत्री मोदी जी को इन असफलताओं की सच्चाई का सामना करने के लिए नैतिक साहस के साथ आत्ममुग्धता के दायरे से देशहित में बाहर आना चाहिए। हर क्षेत्र में निराशाजनक प्रदर्शन के लिए बेहतर होगा भाजपा खोखली उपलब्धियों का ढिढोरा पीटने की जगह अपने प्रधानमंत्री को देश से क्षमायाचना की अविलम्ब सलाह देने की हिम्मत जुटाये।
श्री तिवारी ने सवाल करते हुये कहा है कि मोदी जी वर्ष 2014 में आवष्यक वस्तुओं की कीमत क्या थी ? और वर्ष 2025 में उनकी कीमत क्या है ? इसी तरह बेरोजगारी का मानक वर्ष 2014 में क्या था ? और आज वर्ष 2025 में क्या है ? यही दो बातों का सही आंॅकड़ा बता दीजिये- सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जायेगी।

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