– राजनाथ सिंह ने लखनऊ में ब्रह्मोस एकीकरण और परीक्षण सुविधा केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन किया
वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी) /अजय कुमार
नई दिल्ली / लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ब्रह्मोस एकीकरण और परीक्षण सुविधा केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर अपने वर्चुअल संबोधन के दौरान कहा, “ ऑपरेशन सिंदूर न सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की राजनीतिक, सामाजिक और रणनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक था।” उन्होंने इस ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सशस्त्र बलों की क्षमता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन बताया, जिसने उन निर्दोष परिवारों को न्याय सुनिश्चित किया, जिन्होंने भारतीय धरती पर भारत विरोधी और आतंकवादी संगठनों के हाथों अपने प्रियजनों को खो दिया था।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को इस बात का सबूत बताया कि जब भी भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो सीमा पार की जमीन भी आतंकवादियों और उनके आकाओं के लिए सुरक्षित नहीं होती। उन्होंने कहा कि उरी में हुई आतंकी घटना के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा हमले के बाद की गई एयर स्ट्राइक और अब पहलगाम हमले के जवाब में भारत द्वारा की गई कई स्ट्राइक के जरिए दुनिया ने देख लिया है कि अगर भारत की धरती पर कोई भी आतंकी हमला होता है, तो वह क्या कर सकता है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह अभियान पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करने के लिए शुरू किया गया था और इसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन पाकिस्तान ने भारत में नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया और मंदिरों, गुरुद्वारों और चर्चों पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, हमारे सशस्त्र बलों ने वीरता और संयम का परिचय दिया और पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला करके मुंहतोड़ जवाब दिया। हमने न केवल सीमा से सटे सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की, बल्कि हमारे सशस्त्र बलों का आक्रोश रावलपिंडी तक पहुंच गया, जहां पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय स्थित है।
ब्रह्मोस एकीकरण एवं परीक्षण सुविधा केंद्र के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों को मजबूत करेगा तथा महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन करके क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देगा। उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर उद्घाटन को एक ऐतिहासिक क्षण बताया, जो भारत की बढ़ती नवीन ऊर्जा को दर्शाता है तथा महत्वपूर्ण, उच्च स्तरीय एवं अग्रणी प्रौद्योगिकियों में तेजी से हो रहे वैश्विक परिवर्तन के साथ संरेखित है। ब्रह्मोस न केवल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, बल्कि यह भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत, दुश्मनों के लिए प्रतिरोध का संदेश और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता का संदेश है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस भारत और रूस की शीर्ष रक्षा प्रौद्योगिकियों का संगम है।
रक्षा मंत्री ने भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हवाला देते हुए बताया, जिन्होंने कहा था कि ‘जब तक भारत दुनिया के सामने खड़ा नहीं होगा, कोई भी हमारा सम्मान नहीं करेगा। इस दुनिया में, डर का कोई स्थान नहीं है, केवल ताकत ही ताकत का सम्मान करती है’, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत आज सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है और केंद्र भारत की शक्ति को और मजबूत करने में मदद करेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा, यूपीडीआईसी में अब तक 34,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के साथ कुल 180 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं और 4,000 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही किया जा चुका है। विमान निर्माण, यूएवी, ड्रोन, गोला-बारूद, मिश्रित और महत्वपूर्ण सामग्री, छोटे हथियार, कपड़ा और पैराशूट आदि में प्रमुख निवेश किए गए हैं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इसमें सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी देखी जा रही है। लखनऊ में ही पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा टाइटेनियम और सुपर एलॉय मैटेरियल प्लांट शुरू किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सात अतिरिक्त महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव रखी जा रही है। जिससे रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की गति को बाल मिलेगा।
श्री सिंह ने सरकार के मेक-इन-इंडिया, मेक-फॉर-द-वल्र्ड के दृष्टिकोण को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि आत्मनिर्भरता का मतलब केवल भारत की अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना ही नहीं है, बल्कि इसका मतलब देश को वैश्विक बाजार में रक्षा उपकरणों का प्रमुख निर्यातक बनाना भी है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए, जिसमें कहा गया है कि 2024 में वैश्विक सैन्य व्यय बढ़कर 2,718 बिलियन डॉलर हो गया है, उन्होंने कहा कि इतना बड़ा बाजार एक अवसर है जिसका भारत को लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, ब्रह्मोस सुविधा का शुभारंभ भारत को दुनिया के रक्षा उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उद्घाटन स्थल पर अपने सम्बोधन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ को रक्षा विनिर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में यह सुविधा मेक-इन-इंडिया पहल, आत्मनिर्भरता और रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगी।