वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
जगदीशपुर (अमेठी)। जगदीशपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉ. संजय कुमार बीते 12 वर्षों से लगातार तैनात हैं, और इसी केंद्र पर अधीक्षक पद पर पदोन्नति भी पा चुके हैं। अब डॉ. संजय कुमार की तैनाती व प्रौन्नति उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति 2024-25 पर प्रष्नचिन्ह लगा रही है, यह भी हो सकता है कि यह प्रशासनिक लापरवाही हो या फिर प्रभावशाली संरक्षण ? जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति 2024-25 के अनुसार समूह क और ख के अधिकारियों की एक जिले में अधिकतम 3 वर्ष और मंडल स्तर पर 7 वर्ष से ज्यादा तैनाती नहीं होनी चाहिए, यह नीति 11 जून 2024 को मंत्रिमंडल से स्वीकृत हुई थी, जिसमें तबादले की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित थी और नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया था। परंतु जमीनी सच्चाई इसके उलट दिखाई देती है।
जहां अन्य चिकित्सकों का नियमित तबादला होता रहता है, वहीं इस केंद्र पर एक ही अधिकारी की दीर्घकालिक तैनाती और पदोन्नति नियमों की अनदेखी और प्रभावशाली संरक्षण की ओर इशारा करती है। वहीं, सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ, डेंटल सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट जैसे कई आवश्यक पद लंबे समय से रिक्त हैं। इमरजेंसी सेवाओं में चिकित्सकों की कमी के चलते फार्मासिस्ट मरीजों को देख रहे हैं, और महंगी बाहरी दवाएं लिखी जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ चिकित्सक सरकारी आवास में रहकर निजी क्लीनिक भी संचालित कर रहे हैं, जो नियमों के विपरीत है। अब प्रश्न उठता है कि जब मुख्यमंत्री की शून्य सहनशीलता नीति और शासनादेश का पालन नहीं हो रहा, तो क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर प्रभावशाली संरक्षण ?