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कुम्भ भारत की दिव्य ज्ञान परम्परा तथा समाज की वर्तमान चुनौतियों के बारे में चिन्तन-मनन करने की केन्द्रस्थली रही है: मुख्यमंत्री

वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/ अजय कुमार
लखनऊ। कुम्भ भारत की दिव्य ज्ञान परम्परा तथा समाज की वर्तमान चुनौतियों के बारे में चिन्तन-मनन करने की केन्द्रस्थली रही है। यहां से जो निष्कर्ष निकलते थे, वह उस समय के समाज का मार्गदर्शन करते थे। समाज इनसे प्रेरणा प्राप्त करता था। कुम्भ की यही परम्परा विस्तार लेते हुए आज वर्तमान रूप में है। वर्ष 2019 का प्रयागराज कुम्भ सभी ने देखा है। इसमें सरकार ने लीक से हटकर कार्य किये। केन्द्र और राज्य सरकार ने मिलकर प्रयागराज कुम्भ को आस्था व आधुनिकता के संगम तथा एक नए प्रतिमान के रूप में स्थापित किया था। मुख्यमंत्री रविवार को हिन्दुस्तान समाचार पत्र समूह द्वारा आयोजित ‘हिन्दुस्तान: दिव्य महाकुम्भ 2025’ कॉन्क्लेव के अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। कॉन्क्लेव में हिन्दुस्तान के प्रधान सम्पादक शशि शेखर ने मुख्यमंत्री को प्रयागराज त्रिवेणी का गंगाजल भेंट किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ की परम्परा भारत की चिन्तनशील प्रकृति का प्रतीक है। हमने उसे आध्यात्मिक व धार्मिक दृष्टि से मान्यता दी है। देवासुर संग्राम के साथ कुम्भ की पौराणिक मान्यता को जोड़ा है। अमृत वहीं निकलता है, जहां ज्ञान की दिव्य धारा प्रस्फुटित होती है। भारत की ऋषि परम्परा इसी दिव्य ज्ञान को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण केन्द्रों के रूप में कुम्भ के क्षेत्रों को जानती है। इनमें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन तथा नासिक-त्रयम्बकेश्वर, इन चार स्थानों पर प्रति 12 वर्ष के अन्तराल पर कुम्भ के आयोजन होते हैं। प्रयागराज में अर्द्धकुम्भ भी होता है। शेष जगह कुम्भ ही आयोजित होते हैं। ‘वर्ष 2019 के अर्द्धकुम्भ को प्रयागराज कुम्भ के रूप में तथा प्रयागराज पूर्ण कुम्भ को महाकुम्भ के रूप में आयोजित करने का हमारी सरकार को सौभाग्य प्राप्त हुआ है।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज महाकुम्भ 2025 के स्वच्छ, सुरक्षित व सुव्यवस्थित आयोजन के लिए तथा वहां आस्था व आधुनिकता का संगम दिखायी दे, इसके लिए पूरी तैयारियां की जा रही हैं। कुम्भ के माध्यम से ही प्राचीन प्रयागराज शहर तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों का कायाकल्प हो, यह कार्य भी साथ-साथ चल रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा तथा विरासत के संरक्षण के लिए सभी कार्य पूरी प्रतिबद्धता से किये जा रहे हैं। यह प्रयास भी किया जा रहा है कि इसके माध्यम से प्रयागराज का कायाकल्प भी हो जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार प्रयागराज में पक्के घाटों का निर्माण किया जा रहा है। गंगा नदी में रिवरफ्रंट भी देखने को मिलेगा। संगम का जल निर्मल भी होगा और अविरल भी। प्रधानमंत्री ने प्रयागराज में अक्षयवट कॉरिडोर, सरस्वती कूप कॉरिडोर, बड़े हनुमान जी मन्दिर कॉरिडोर, महर्षि भारद्वाज आश्रम कॉरिडोर तथा श्रृंग्वेरपुर कॉरिडोर का लोकार्पण किया है। श्रृंग्वेरपुर में भगवान श्रीराम और निषादराज की गले मिलती हुई 56 फीट ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया है। साथ ही, प्रयागराज में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, 216 से अधिक मार्गों के चैड़ीकरण जैसे कार्यों के माध्यम से इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर किया गया है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि प्रयागराज महाकुम्भ 2025 दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का जागरण होगा। यह सामाजिक एकता का भी प्रतीक होगा। महाकुम्भ 2025 आर्थिक संवृद्धि के बेहतर रोडमैप को आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी को प्रयागराज महाकुम्भ 2025 में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।

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