अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 8 सितंबर। राजकीय गोविन्द बल्लभ पन्त पालीटेक्नीक (समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित) के प्रधानाचार्य के0 के0 श्रीवास्तव तथा पूर्व जिला समाज कल्याण अधिकारी के0 एस0 मिश्रा के ऊपर भ्रष्टाचार के लगे 17 बिन्दुओं की जॉच लोक आयुक्त द्वारा गहनता से करने के पश्चात के0 के0 श्रीवास्तव तथा के0 एस0 मिश्रा पर लगे आरोपों की पुष्टि करते हुए शासन को अपना प्रतिवेदन भेजते हुए आदेश दिया हैं कि इन लोगों ने अपने दायित्वों और कर्तव्यों का निवर्हन ईमानदारीपूर्वक नहीं किया जिसके कारण इन दोनों को सम्यक दण्ड से दण्डित किया जाय। लखनऊ निवासी महेन्द्र अग्रवाल ने लोक आयुक्त में 2018 में इन दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराया था।
गौर तलब हैं कि राजकीय गोविन्द बल्लभ पन्त पालीटेक्नीक कालेज में प्रवक्ता संजय शर्मा को अनियमितताएं, कदाचरण, महिला कार्मिकों के विरूद्ध अश्लील, आपत्तिजनक टिप्पणी करने, उत्पीड़न करने, संस्थान की गोपनीयता भंग करने, अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने, गुटबन्दी करने आदि आरोपों में 14-06-2012 को निलम्बित किया गया था। शासन द्वारा जिला प्रशासन स्तर पर कराये गये जॉच में उन पर लगे आरोपों की पुष्टि होने पर संजय शर्मा को 05-02-2014 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। संजय शर्मा को निलम्बित करते हुए निदेशालय समाज कल्याण से अटैच कर दिया गया था लेकिन संजय शर्मा ने निदेशालय में अपनी ज्वाइनिंग 17-12-2013 (17 महीने बाद) को किया। नियमानुसार संजय शर्मा को जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने का आदेश निदेशालय ने पत्र दिनांक 24-01-2014 के द्वारा प्रधानाचार्य के.के. श्रीवास्तव को दिया। के.के.श्रीवास्तव ने तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी के0 एस0 मिश्रा के साथ मिलीभगत कर शासनादेशों का उल्लघंन कर संजय शर्मा को बेजा फायदा पहुॅचाने की बदनियति से अनाधिकार तरीके से स्वंय ही एक आदेश बनाकर संजय शर्मा को बिना ज्वाइन किए गायब रहने की अवधि का जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान कर दिया जबकि शासन संजय शर्मा के बर्खास्त कर चुका था। यही नहीं के0के0 श्रीवास्तव पर संजय शर्मा को अनाधिकाररूप से फायदा पहुॅचाने, संस्थान-विभाग-शासन को आर्थिक क्षति पहुॅचाने, वित्तीय अनियमितता करने, अनाधिकार रूप से कार्य करने, संजय शर्मा द्वारा निलम्बन तथा बर्खास्तगी बाद भी आज तक चार्ज नहीं देने, कमरे का अनाधिकार रूप से ताला बन्द रखने, लाखों रूपये के संस्थान के सामानों को अपने कब्जे में रखने, क्षति पहुॅचाने आदि के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करने का भी दोषी के0के0 श्रीवास्तव को पाया हैं।
समाज कल्याण विभाग स्तर पर हीलाहवाली करने तथा लीपापोती करने की जानकारी मिलने पर लोक आयुक्त द्वारा प्रतिवेदन 24 मई को भेजा गया और विभाग के अधिकारी- कर्मचारी लोग फाइल को इधर से उधर टहला कर मामले को दबाने की साजिश कर रहे हैं। जबकि लोक आयुक्त ने कृत दाण्डिक कार्यवाहियों की जानकारी तीन महीने में उपलब्ध कराने का आदेश भी दे रखा हैं।