वेब वार्ता (न्यूज एजेंसी)/अजय कुमार वर्मा
लखनऊ 18 अगस्त। बलिया ज़िले से नक्सलियों की हुई गिरफ्तारी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार पर आन्तरिक सुरक्षा की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अनुपम मिश्रा ने जारी एक बयान में कहा कि जो क्षेत्र मुख्यमंत्री का राजनैतिक, सामाजिक तथा धार्मिक कर्म स्थली रहा है वहां उस क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा में ऐसी चूक भयानक खतरे की आहट है।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के छोटे से गांव नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ। यह विद्रोह कैसे भारत के अन्य भूभाग में अपने पैर पसारता चला गया और आज 500 किलोमीटर दूर बलिया में नक्सलियों की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि कितनी योजनाबद्ध तरीके से इस संगठन ने अपनी सक्रियता एक बार पुनः बढानी शुरु कर दी है । बलिया की सीमाएं बिहार से जुड़ती हैं जहां यह संगठन पहले भी सक्रिय रहा है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार को नक्सलवादियों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए इसके सफाए हेतु एक सघन अभियान तत्काल चलाना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि अभी यह विद्रोहियों का प्रारंभिक चरण ही हो। हमारे पास सोनभद्र का अनुभव है कि कैसे हमने इस समस्या को झेला और फिर कैसे उससे उबरे।
अनुपम मिश्रा ने कहा कि अन्याय-ग़ैर बराबरी तथा शोषण के गर्भ से पैदा नक्सलवाद ने कैसे अपनी जड़े अलग अलग प्रदेशों में जमा ली अत: आज इस समस्या का समाधान सरकारी व ग़ैर सरकारी दोनों स्तरों पर करना होगा क्योंकि जब तक शोषित, पीड़ित, भूमिहीन, किसान, मज़दूर, विस्थापित आदिवासी और सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक रूप से पिछड़े वर्गों की समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं होगा तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान भी मुश्किल होगा। नक्सलियों की पूर्वांचल में आहट इस बात का भी संकेत हो सकती है कि जन कल्याणकारी योजनाएं सिर्फ़ विज्ञापनों तक ही सीमित है। धरातल तक पहुँच ही नहीं रही है जिस कारण जन सामान्य मे उपज रहे आक्रोश और असन्तोष का फ़ायदा यह संगठन उठाने का प्रयास कर रहे हों।