– सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय महापुरुषों की जीवनी और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें युवा: योगी
– सर्वोच्च पद पर भी सहज रहे कोविन्द: केशव प्रसाद मौर्य
– सदैव जमीन से जुड़े रहे कोविन्द: सतीश महाना
– गरीबों, पीड़ितों व वंचितों की आवाज बने कोविन्द: ब्रजेश पाठक
वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/अजय कुमार
लखनऊ। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में योगी सरकार बनने के बाद प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिली। उन्होंने विश्वास जताया कि विकास योजनाओं से रोजगार, शिक्षा और आर्थिक प्रगति के अवसर सभी वर्गों तक पहुंचेंगे।
अवसर था लोक भवन, लखनऊ में पूर्व राष्ट्रपति अपनी आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा, मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह का। और पूर्व राष्ट्रपति ने जीवन संघर्ष की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो जैसी परियोजनाओं ने प्रदेश में आवागमन सुगम बनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गरीबों को पक्के मकान मिलने से उन्हें सम्मान और सुरक्षा का एहसास हुआ है।
कोविन्द ने अपने जीवन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा, परिश्रम और अच्छे संस्कारों के बल पर सामान्य परिवार का व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है। उन्होंने युवाओं से राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा राष्ट्रसेवा के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ-2025 ने दुनिया को भारत की आध्यात्मिक चेतना, आस्था और सामाजिक समरसता की शक्ति से परिचित कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये कहा की बड़ा वो होता है जिसमे संघर्ष का जज़्बा होता है,सम विषम परिस्थितियों से जूझने की प्रवित्ति होती है। विपरीत परिस्थितियों में उनसे पलायन नही,उनसे मुकाबला करने का जज़्बा होना चाहिए,यही स्थिति कोविंद जी को महानता की मंजिल तक पहुंचाने में सफल हुई,जहां उन्होंने 5 वर्ष भारत के संवैधानिक प्रमुख के रूप में सफल नेतृत्व दिया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने कोविन्द के सरल स्वभाव, विनम्रता और वंचितों के प्रति संवेदनशीलता की सराहना की। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उनकी आत्मकथा को विधायकों के लिए प्रेरणादायी बताते हुए 500 पुस्तकें खरीदने की इच्छा जताई।